Thursday, December 29, 2016

 तर्ज़-जन्म जन्म का साथ है----।
टेक-कई जन्मों का साथ है हमारा तुम्हारा हमारा तुम्हारा।
    कभी न रूठो हमसे स्वामी चाहे रूठे जग सारा।।

1.  गवाह हमारे प्यार के सूरज चाँद सितारे।
     त्रेता में तुम राम बने और हम वानर तेरे प्यारे।
       द्वापर में हम ग्वाले बने और कृष्ण रूप तुम धारा।।

2.  कलियुग में तुम सतगुरु सन्त रूप में आये।
     कई कोटिन जीवों में हम तेरे गुरुमुख कहलाये।
      हर युग में हम तुझसे जुड़े हैं ये सौभाग्य हमारा।।

3.  सपने में भी सतगुरु ये बन्धन न टूटे।
     तुझसे प्रेम पुराना संग कभी न छूटे।
      प्रीत का मार्ग अति कठिन है तेरा एक सहारा।।

4.  हर पल ध्यान हो तेरा ये ही विनय हमारी।
     आठों पहर आँखों में बसे ये सूरत प्यारी।
      मरते दम हो नाम ज़ुबाँ पर ""प्रेमी'' कहे पुकारा।।

Thursday, December 1, 2016

-कर दो प्रभु अब कर दो रहमत की नज़र अब कर दो।

  तर्ज़--बच्चे मन के सच्चे------।
  टेक--कर दो प्रभु अब कर दो रहमत की नज़र अब कर दो।
     कब से आस लगाये बैठे खाली झोली भर दो।।

  1.    सृष्टि के हर कौने में तेरी दया की धूम मची।
      जो भी आया शरण तेरी उस पर तूने रहमत की।
        शान तेरी को सुन करके झोली फैलायी तेरे दर पे।
        अपनी प्रेमा भक्ति से प्रभु जी इसको अब तो भर दो।।

  2.    मेरे ह्मदय मन्दिर में नाम की अनुपम ज्योति जगे।
      लिव लग जाये चरणों से दिल में बस तू ही तू रहे।
        ये है मेरे दिल का भाव और नहीं है कुछ भी चाव।
        करुणा के सागर सतगुरु जी इतनी दया अब कर दो।।

  3.    निशदिन तव चरणों के संग जुड़ी रहे तार मेरे दिल की।
      इक पल कभी न दूर होऊँ मन्ज़ूर करो प्रभु विनती।
        तुम ही हो बस दास के मीत पाऊँ सदा तेरी निर्मल प्रीत।
        ये उपकार नहीं भूलूँगा अपनी भक्ति का वर दो।।

Thursday, November 17, 2016

दुर्लभ मानुष तन को पाकर दुर्लभ वस्तु को पाना है।

तर्ज़--दिल लूटने वाले-----।
टेक--दुर्लभ मानुष तन को पाकर दुर्लभ वस्तु को पाना है।
                मालिक की भक्ति कमा करके इस जन्म का लाभ उठाना है।।

1.इस दुर्लभ देहि की महिमा सन्तों ग्रन्थों ने उचारी है।
        इस जीवन की जो करता कदर उसे कीमत मिलती भारी है।
            हर घड़ी हर पल हर स्वांस स्वांस मालिक का नाम ध्याना है।।

2.तेरे जीवन का जो मकसद है सतपुरुष तुझे बतलाते हैं।
        अपने सुन्दर उपदेशों से प्रभु की पहचान कराते हैं।
            सतगुरु की पावन सेवा कर लोक और परलोक बनाना है।।

3.है असली काम तेरा जग में केवल प्रभु की भक्ति करना।
        सिवा इसके दीगर कामों में तुम चित को कभी नही धरना।
            दुनियाँ के बखेड़ों में फँसकर मकसद को नहीं भुलाना है।।

4.यह लक्ष्य तभी होगा हासिल जब दास गुरु का बन जायेगा।
        होगा जीवन सफल तेरा जब सतगुरु के गुण गायेगा।
            चलकर श्री मौज और आज्ञा में सतगुरु प्यारे को रिझाना है।।

Friday, November 11, 2016

रभु जी हमें भूल न जाना कर्म इतना फरमाना।

तर्ज़--बड़ा बेदर्द जहाँ है ये----।
        टेक--प्रभु जी हमें भूल न जाना कर्म इतना फरमाना।
                जैसे भी हो सके तो जल्दी ही आना।।

        1.        तुमसे बिछुड़ कर मेरे प्रीतम दिल को चैन न आये।
                  हर समय दुःख गम के बादल रहते दिल पे छाये।
                    दर्श की प्यासी आँखें हर पल पल ये तड़पें।
                        मुश्किल हो जाता है इक पल बिताना।।
        2.        तुम बिन सूनी सूनी लगती नगरी श्री आनन्दपुर की।
                  विरह अग्नि सी बढ़ जाती है पीर मेरे ह्मदय की।
                    लगे सब ओर अन्धियारा सूझे न कोई किनारा।
                        दुखी दिल को प्रभु धीर बँधाना।।
        3.        दिल का हाल सुनाऊँ किसको तुम बिन कौन है मेरा।
                  तुम संग ही बहारें मुझको जीवन में भी उजेरा।
                    सुन लो दिल की पुकार मेरे दयालु दातार।
                        अपने विरद की लाज बचाना।।
        4.        करुणा के सागर मेरे स्वामी जल्दी देना दीदार।
                  आपके श्री चरणों में दास की अर्ज़ ये बारम्बार।
                    न देखना मेरे अवगुण करना ये रहमत भगवन।
                         प्यासी अँखियों की प्यास बुझाना।।

Sunday, November 6, 2016

झल्ली जांदी न जुदाई सोहणे पीर दी

टेक-झल्ली जांदी न जुदाई सोहणे पीर दी, न किसे दा प्यारा बिच्छड़े।
    होवे अखिआं तों ओहले सोहणा यार जी, पैण बे-शुमार दुःखड़े।।
4.प्रेम सच्चे दा मैं हाल हाँ सुणावंदा। बिना गुरु दे ना होर कुझ भांवदा।
   लग्गे होण ढेर दौलतां हज़ार जी, ना किसे दा प्यारा बिच्छड़े।।
5.दस्सां गुरु दे विछोड़े वाला हाल जी। बिते इक दिन बराबर कई साल जी।
  कदी आँवदा ना सबर करार जी, ना किसे दा प्यारा विच्छड़े।।
7.इक पीर बिना सुन्ना दिससे जग्ग जी। लाटां मारदी जुदाई वाली अग्ग जी।
   दर्शन गुरु दा सीने नूँ देन्दा ठार जी, न किसे दा प्यारा विच्छड़े।।
8.'सतनाम जी'जुदाई झल्ल सके ना। याद कर "मस्ताना जी' नूं थके ना।
    नालों एस जुदाई देन्दा मार जी, ना किसे दा प्यारा विच्छड़े।।

Wednesday, November 2, 2016

छत्रछाया श्री सतगुरु की खुशियों का भण्डार।

तर्ज़-सबसे सुन्दर------।
टेक-छत्रछाया श्री सतगुरु की खुशियों का भण्डार।
        महिमा श्री सतगुरु जी की फैली सब संसार।।
            सदा तेरा प्यार पाऊं, और तुझको ही ध्याऊं।।
1.    निर्मल प्यार है पाया , प्रभु चरण शरण में आके।
        पाया प्रभु अविनाशी, कई जन्मों के भाग हैं जागे।
            पूरा सतगुरु पाया हमने, महिमा जिनकी अपार।।
2.    नाम को जपने वाला, होता है गुरु को प्यारा।
        अन्तर्मुख हो जो रहता , रहता जग से न्यारा।
            ज्ञान की ज्योति जगाते भगवन, गुरु हैं बख्शनहार।।
3.    अनहद नाद सुनाकर, सब कारज करते रास।
        शब्द की है ये कुन्जी, पूरे सतगुरु के पास।
            कई जन्मों के पुण्य करम से पाया है गुरुद्वार।।
4.    भाग हमारे जागे पाये हमने प्रभु प्यारे।
        खुशनसीब हैं सब पाये जो सुन्दर नज़ारे।
            यहाँ मिलेगा ऐसा हमको बिन स्वार्थ का प्यार।।
5.    धन्यवाद गुरु का दासा, शुक्रिया बारम्बार।
        एहसान गुरु का भारा, महिमा है अपरम्पार।
            भक्तों के आधार प्रभु हैं सन्तों के सिरताज।।

Thursday, October 27, 2016

इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।

तर्ज़-तुझे सूरज कहूँ या चन्दा----।
टेक-इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।
    दुनियाँ जिसे सीस झुकाती वो है दरबार तुम्हारा।।

1.गुरुदेव के दर्शन करना शुभ कर्मों का ही फल है।
  बिन भाग न दर्शन होते समझो यह बात अटल है।
  भगवान ने ही इस युग में लिया परमहँस अवतारा।।

2.प्रेमा भक्ति शान्ति का बस यही एक खज़ाना है।
  मिली सच्ची राहत उऩको जिन्होने इनको माना है।
   श्री मुख से रोज है बहती वचनों की अमृत धारा।।

3.यह परमार्थ का तकिया यह एक दरबार रूहानी।
  है फकीरी भी गोया यहाँ की है तख्ते सुलेमानी।
  छू लेता नील गगन को दरबार का जैकारा।।

4.सेवा सत्संग भजन के उपहार यहां से मिलते।
  पलटे हालत इस मन की अन्तर के पट हैं खुलते।
  जीवन रूपी कश्ती का दासा यही किनारा।।

Saturday, October 22, 2016

तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।

तर्ज़-बहुत प्यार करते हैं-----।
    टेक-तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।
         रूठे हो तुम जो मनायेंगे हम।।
    1.  जग से मिली है हार करारी।
           तभी तेरे दर पे है झोली पसारी।
              दुखड़ा ये दिल का सुनायेंगे हम।।
    2.  कर्मों के मारे तुझको पुकारें।
           जीये जा रहे हैं तेरे सहारे।
              आखिर तो मन्ज़िल को पायेंगे हम।।
    3,  तुम न सुनोगे कौन सुनेगा।
           पथ के ये काँटे कौन चुनेगा।
              भटके हुए कहाँ जायेंगे हम।।
    4.  दासनदास की ये ही पुकार।
           सदा मेरे दिल में हो तेरा ही प्यार।
              दर्शन तेरा पायेंगे हम।।

Tuesday, October 18, 2016

असाँ जाणा गुरां जी दे कोल वे।

टेक-असाँ जाणा गुरां जी दे कोल वे।
         मुखों जय जय गुरां दी बोल वे।।
    1.   ओदे नाम दी महिमा भारी।
             उत्थे जांदे ने कुल संसारी।
                चल तू वी न जीवन रोल वे।
                     छेती करले तू बिस्तर गोल वे।।
    2.   छड दुनियाँ दे झूठे चाले।
             सतगुरां दे दर्शन पाले।
                 क्यों फिरना तू डावांडोल वे।।

    3.   उत्थे तैंतीस करोड़ी देवता आउँदे।
             मेरे शाम जी दी महिमा नूं गाऊंदे।
                 नाले खुशियां दे वजदे ढोल वे।।

    4.   उत्थे नाम दी जोत पई जगदी।
             ज्ञान भक्ति दी गंगा वगदी।
                 तू वी भर लै अपनी झोल वे।।

    5.   चल पहली गड्डी ते चलिये।
             प्रेमी बुआ गुरां दा मलिये।
                 तेरा हीरा जन्म अनमोल वे।।

Friday, October 14, 2016

मेरा हाड़ा सज्जणा आजा वे, चन्न वरगा मुख दिखला जा वे।

टेक-मेरा हाड़ा सज्जणा आजा वे, चन्न वरगा मुख दिखला जा वे।
                 इक वारी प्यास बुझा जा वे।।
1.में रो रो देआं दुहाइयां वे, तेरे इश्के मार मुकाइयां वे।
    हुण सह ना सकां जुदाइयां वे, सुण मेरे महरम साँइयाँ वे।
      मेरे पीड़ करदे जख्मां दे, आके दीद दवाई लाजा वे। मेरा हाड़ा----।
2.मैं झूठ ना सज्जणा बोलां वे, मैं कुफ्र ना सज्जणा तोलां वे।
    तेरे इश्के मैनूं फूक दित्ता, दिल सड़ के होया कोला वे।
      इह दस्सण वाली गल्ल नहीं, मैं कित्थे पावां रौला वे।
        मुड़के इश्के दी अग्ग भखा के ते, कोले नूं सुर्ख बणाजा वे।
3.प्यार पाउण तों पहलों जाणू सै, इह प्यार निभाउणा पैणा है।
    इस प्यार विच सज्जणा सुख कित्ते, कुझ कष्ट उठाउणा पैणा है।
      हुण पैंडा सज्जणा छुटणा नहीं, तैनूं दीद दखाउणा पैणा है।
        दीद बूंद तों  प्यासी मर गई जे, पिछों भावें बण घटा आजा वे।
4.जो इश्क तेरे नाल लाया है, नाल जान मेरी दे जावेगा।
    इह रोग अवल्लड़ा लगिआ है, जो मैनूं मार मुकावेगा।
      इहदी इक्को ही दीद दवाई है, जो तेरे कोल बताई है।
        इक पल वी मेरी आस नहीं, तूं समझें रोगी खास नहीं।
           फिर पुछेगंा तूं सज्जणा वे, इह किसदा है जनाजा वे।
5.जे सज्जणा तूं नहीं आ सकदा, जे मुखड़ा नहीं दिखा सकदा।
   खैर प्यार दी जे नहीं पा सकदा, जे कष्ट तूं नहीं उठा सकदा।
    मैं कष्ट तैनूं हुण देणा नहीं, बस फिर कदे वी कहणा नहीं।
      बस इक्को ही इच्छा मेरी जी, हुण जद वी पाओगे फेरी जी।
       इह मेरी सी बस गल्ल इतनी, मेरी कब्रा ते तूँ लिखवाजा वे।
           मेरा हाड़ा सज्ज्णा----।

Sunday, October 2, 2016

दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।

तर्ज़-रेशमी सलवार-----।
टेक-दे दो भक्ति प्रेम का हमको दान प्रभु।
        गायेंगे हम तेरे सदा गुणगान प्रभु।।

1.    तेरे चरणों में हम हैं आये, दिल में यह ले कर आसा।
    तेरी पावन भक्ति का ही, मनुआ सदा रहे प्यासा।
                                 करो एहसान प्रभु।।
2.    तेरी अनुपम भक्ति की महिमा, जाए न ज़ुबाँ से बखानी।
    जिस पे किरपा हो तेरी, पाता वही है प्राणी।
                                कि सुख की खान प्रभु।।
3.    तेरी भक्ति बिना ऐ स्वामी, कई जन्म हैं हम ने गँवाये।
    मन माया के धोखे में आकर, हैं कितने कष्ट उठाये।
                                करो कल्याण प्रभु।।
4.    श्री चरणों की भक्ति की बख्शिश, हम पर सतगुरु जी कर दो।
    खाली झोली है हमारी, इसे अपनी भक्ति से भर दो।
                                जायें कुरबान प्रभु।।
5.    हम जन्म जन्म दाता जी, तेरे दासनदास कहायें।
    तेरी पावन भक्ति करके, जीवन को सफल बनायें।
                                दे दो वरदान प्रभु।।

Sunday, September 25, 2016

सतगुरु का यह शुभ जन्मदिन आया है,

तर्ज- दुल्हे का सेहरा
रुबाईः-शहनाईयों की सदा कह रही है,
जन्मदिन की मुबारक घड़ी आ बई है
सजे चादं तारों में वह कमाल दिख रहें हैं,
 ज़मीं पे फल्क से मेरे भगवन आ गये हैं

मुखड़ाः-सतगुरु का यह शुभ जन्मदिन आया है, खुषियों में आज सब का मन हर्षाया है
जगमग ज्योति जगी है सबके हिरदे में, धरती पर भगवान हमारा आया है

1    तेरी रहमत का सदा यूं, हाथ हो सिर पर,
तेरा सुमरण तेरा दर्षन, करूं तेरे दर पर
तेरा यह दर्षन सुहाना पाया है, धरती पर भगवान हमारा आया है

2    खूबसूरत यह जो घड़ियां आज आई हैं
आज जन्मदिन की लाखों लाख वधाई है
सुन्दर यह सुहाना दर्षन पाया है,धरती पर भगवान हमारा आया है

3    तेरे जेसा रूप न देखा चादॅं सितारों में
ऐसा यह नूरानी जल्वा नहीं बहारों में
प्रेमियों ने आज तुमको पाया है, धरती पर भगवान हमारा आया है

4    आज तेरे दर पर सचखंड का नज़ारा है
       त्रिलोकी में तेरे जेसा नहीं द्वारा है
दासों ने यह दिव्य दर्षन पाया है,धरती पर भगवान हमारा आया है



Friday, September 16, 2016

जग तों निराले मेरे गुरु महाराज।

तर्ज़--इक परदेसी मेरा दिल----।
टेक--जग तों निराले मेरे गुरु महाराज।
    आके मेरी अँखियाँ दे अन्दर विराज।।

1.    मिटया अन्धेरा दुःख दर्द मेरा।
        पाया जो दर्शन सतगुरु जी तेरा।
           मेरी ज़िन्दगी दी बड़भागी दिन आज।।

2.    अखियाँ विच वस जा प्राणाँ विच वस जा।
         अँग अंग विच मेरे सतगुरु जी रच जा।
          तैनूँ पाके रहवाँ न किसे दा मोहताज।।

3.    बेड़ी पुरानी गहरा पानी।
       तेरी ही आस मैंनूँ तूं ही पार लगानी।
          तू मल्लाह तेरा नाम है जहाज़।।

4.    दुनियाँ भुलाई आस गँवाई।
         तेरे बगैर मेरा कोई न सहाई।
            दास बेचारे दे सँवार दे काज।।

Monday, September 12, 2016

हर पासे अज रौनकाँ बहारां,

तर्ज़-पहलां सतगुरु नूं अपना----।
टेक-हर पासे अज रौनकाँ बहारां,निराला कोई पीरआ गया।
    इस घड़ी उत्तों की कुझ वारां,मैं सोहणा दीदार पा लिया।।
                            कि धरती ते रब आ गया।।
1.धुरधाम तों उतरी ऐ शक्ति,चौकुण्ठी विच महिमा फैली।
     इसदे रूप दा वेख लिशकारा, जग ते निहाल हो गया।।

2.रामकृष्ण कदी नानक बनदे,हरयुग विचआंदे रूप बदल के।
  हुण रूप निराला ऐ धारा, कि भक्तां दे दिल नूं भा गया।।

3.प्रेमी जनां नूं छाई मस्ती, वेख के प्यारी सोहणी झाँकी।
    दीवाना बनाया जग सारा, निराला कोई पीर आ गया।।

4.ब्राहृा विष्णु स्तुति गाँदे, ऋषि मुनि सारे ध्यान लगांदे।
   मंगदे चरणां दा ओह वी सहारा,तेरे नाल दिल ला लिया।।

5        युगयुगराजकरोरहोसलामत,रोशन जहां मेरा तेरे नाल मालिक
          रहे सिर ते अटल तेरा साया, तेरे नाल प्यार पा लिया।।
6.    सब नूं मुबारिक कोटि मुबारिक 20 सितम्बर मुबारक।
    अज दा दिन बड़ा करमां वाला,कि मैं ता मालामाल हो गया।।
                            कि मैं ताँ निहाल हो गया।।

Thursday, September 8, 2016

दुःखी जीवों की सुन के विनय,

टेकः-दुःखी जीवों की सुन के विनय, प्रभु ने अवतार लिया।
     खुशियाँ ही खुशियाँ हैं, चहुँ दिशी जयकार हुआ।।

1. दिन बीस सितम्बर का, सन् उन्नीस सौ छब्बीस था।
     छोड़ अपना धाम प्रभु जग में अवतार लिया।।
        पंचम रुप में प्रकट हो, जीवों को दीदार दिया।।
2. पाप धरती पे जब था बढ़ा मच रही थी हाहाकार।
     आए जगत में कुल मालिक, करने सृष्टि का उद्धार।।
        यही लक्ष्य है इनका केवल, दुनियाँ में आने का।।
3. भेष सन्तों का धर कर, युग युग प्रभु आते हैं।
     भूली भटकी रुहों को, सतमार्ग दिखाते हैं।।
        अपने श्री चरणों का, देते हैं सहारा सदा।।
4. हम जीवों पे प्रभु ने, किया कितना है उपकार।
     प्रेमा भक्ति का अनुपम यह खोला है दरबार।।
        बलिहार सदा जाएं, एहसान जो हमपे किया।।
5. हम जीवों की प्रभुवर, बस यह है अभिलाषा।
     तेरे भिक्षुक बन करके, तेरे द्वारे पे रहें सदा।
        श्री चरणों के दास बने, करें निशदिन दर्श तेरा।।

Thursday, September 1, 2016

पाया जदों दा मैं तेरा द्वारा मैं

तर्ज़--जी मैं लख लख खुशियाँ------।
    टेक--पाया जदों दा मैं तेरा द्वारा मैं सुखाँ दा भण्डार पा लिया।
            सतगुराँ जी नूं अपना बणा के नवाँ संसार पा लिया।।
    1.        बहुत गुराँ जी दी होई मेहरबानी ए।
              बख्शी जिन्हाँ ने सच्ची दात रुहानी ए।
                सुत्ते जाग पये कर्म ने मेरे जो साहिब दा दीदार पा लिया।।
    2.        गुरु दरबार दी ऐ ही पढ़ाई ऐ।
              सिधी ऐही गल जिन्दी समझ विच आई ए।
                बहुत लोड़ नहीं पढ़न पढ़ान दी भेद असाँ सार पा लिया।।
    3.        मोह माया ने पाया सी घेरा।
              रंग ढंग सारा बिगड़िया सी मेरा।
                ऐसा प्रेम दा जादू चलाया बन्धन तो छुटकार पा लिया।।
    4.        शरण गुराँ दी असीं जे न आँदे।
              पता नहीं कित्थे कित्थे धक्के होर खाँदे।
                पुण्य कर्म दी ऐही निशानी ऐ सच्चा दरबार पा लिया।।
    5.        उपकार गुराँ जी दे किवें सुनाईये।
              चरण कमल सदा ह्मदय वसाईये।
               जेहड़ा सबनूँ बख्शनहारा ओ सच्चा करतार पा लिया।।
    6.        दास गुराँ जी दा द्वार न छोड़ीं।
              गुरु सेवा तो कदी मुँह न मोड़ीं।
                जेहड़ी शै न कित्थे मिलदी ऐत्थे औ भण्डार पा लिया।।

Sunday, August 28, 2016

मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।

तर्ज़--साजन साजन-------।
 टेक--मेरे सतगुरु तेरे उपकार हैं महान।
नहीं ताकत मुझमें करूँ जो ब्यान।।

1.        छोड़ अर्श को फर्श पे आये हो तुम।
अपने भक्तों के दिल की पुकार को सुन।
रहमत के सागर तुम भगवान।।

2.        लाखों कष्ट उठाये हमारे लिये।
गम चिन्ता फिकर सब दूर किये।
नहीं तुझसा कोई दुनियाँ में दयावान।।

3.        देकर नाम का धन कर दिया भरपूर।
भर दिया मेरे दिल में अपना ही नूर।
करूँ क्यों न अपनी किस्मत पर मान।।

4.        तेरा दामन नहीं छोड़ेंगे कभी।
दास तुझपे निसार करेंगे ज़िन्दगी।
जब तक मेरे इस तन में हैं प्राण।।

Wednesday, August 24, 2016

री सतगुरु किरपा कर हमको बार बार समझाते हैं।

तर्ज़-रामचन्द्र कह गये-------।
        टेक-श्री सतगुरु किरपा कर हमको बार बार समझाते हैं।
                जिसमें भला हमारा है यह भेद हमें बतलाते हैं।।

        1.        सतगुरु जैसा मीत नहीं कोई, और जगत में पाया है।
                भूले भटके जीवों को जो, राह सीधी दिखलाते हैं।।

        2.        निर्भर अपने ख्यालों पे है, जीव का दुःखी सुखी होना।
                इसीलिये ये सतसंगत की, महिमा सदा फरमाते हैं।।

        3.        अपने साथ मिलाने आये, पर उपकारी सतगुरु मेरे।
                जिनकी संगत सोहबत से,बिगड़े कारज बन जाते हैं।।

        4.        वही सुखी प्राणी है जग में, जिन्हों को प्रभु प्यार मिला।
                जगत की झूठी मोह ममता में, वह न कभी भरमाते हैं।।

        5.        दासनदासा गुरु वचनों का, मिला जो हमें खज़ाना।  
                वही राह अपनायें सदा, जिस राह पे सन्त चलाते हैं।।

Monday, August 22, 2016

बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।

तर्ज़--पूजो पूजो रे प्रेमियों-------।
टेक--बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।
बाँधा जिसने भी प्रेम का धागा रे-2 ।
उसकी रक्षा करेंगे बन के साथी।।   

1. पक्का धागा ऐसा बाँधो डोर न टूटने पाये।
    हर संकट से उनको बचाते जो शरण में आये।
    बाँधा जिसने भी-------।।
   
2. प्रेम का धागा बाँधो भाई आज है राखी आई।
    सतगुरु को हमराज़ बना लो जो लोक परलोक सहाई।
     बाँधा जिसने भी-------।।

3. बहना जैसी प्रीत तू रखना सतगुरु संग ऐ दासा।
   भ्रातः जैसा नेह रखेंगे तुम संग सतगुरु दाता।
    बाँधा जिसने भी-------।।

4. सतगुरु तेरा राहबर साचा सबके हैं हितकारी।।
    बाँध के डोरी सतगुरु को तू सौंप दे ज़िम्मेवारी।
    बाँधा जिसने भी--------।।

Thursday, August 18, 2016

क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।

तर्ज़--    कोई जब राह न पाये------।
टेक--    क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।
    कि तुझ से नेह लगाये, पाये वही धन सार।।
  
1.    पाकर तेरा साचा प्यार।
      नाश होवे मोह का अंधियार।
        भूल जाये उसको संसार।
        तेरे ही गुण गाये न और कुछ चाहे।।
  
2.    कंगले से होवे धनवान।
      प्रीत तेरी का पीकर जाम।
        दुनियाँ से फिर क्या उसको काम।
        तन मन तुझ पे लुटाये कि तेरा बन जाये।।
  
3.    दासा सतगुरु हैं सुखधाम।
      कैसा प्यारा प्यारा है नाम।
        सबसे ऊँचा है इनका धाम।
        निज घर को वह पाये जो आप मिटाये।।

Sunday, August 14, 2016

तेरा ही आसरा है तेरा ही आसरा है।

तर्ज़-दिल दा मामला है-----।
टेक-तेरा ही आसरा है तेरा ही आसरा है।
कुर्बान जानों तन प्रभु जी तुम्हारे वास्ते हर वक्त तरसे मन।।
1.मैं हूँ तेरा पुजारी तेरे दर का भिखारी।
   माया से ठोकर खाके आया मैं शरण तिहारी।
    तेरा सच्चा द्वारा मुझको देना सहारा।
     बिगड़ी बनाये पल में तेरा बस एक इशारा।
      तेरे बिन कौन सुनेगा ये दिल का दर्द हमारा।
       हो पीड़ा हरो सजन तेरा ही आसरा है।।
2.मेरी है जान तू ही धर्म ईमान तू  ही।
   दिल में बसा के रखूँ मेरा भगवान तू ही।
    तेरा ही सब कुछ स्वामी मान अभिमान तू ही।
     मेरा मुझमें कुछ नहीं जो किछु है सो तोय।
      तेरा तुझको सौंप दूँ क्या लगेगा मोय।
       मेरी है शान तू ही मेरी ज़ुबान तू ही।
        जीवन के इस कमरे का मालिक मकान तू ही।
         मुर्दों में जान जो फूँके ऐसी मुस्कान तू ही।
          हो तुझसे लगी लगन तेरा ही आसरा है।।
3.तेरा दीवाना हूँ मैं तेरा मस्ताना हूँ मैं।
   शमां पे जो मिट जाये वही परवाना हूँ मैं।
    तुझपे सब कुछ लुटा दूँ और खुद को मिटा दूँ।
     सब कुछ है तेरा प्रभु चरणों में भेंट क्या दूँ।
      तू है सुख का समुन्दर नन्हा सा मैं कतरा हूँ।
       हो चाहूँ तेरा करम तेरा ही आसरा है।।

Wednesday, August 10, 2016

-जे संगतो तुसाँ गुरां जी नूँ पाना ए।

  तर्ज़ः-तेरी हाँ तेरी---
टेकः-जे संगतो तुसाँ गुरां जी नूँ पाना ए।
     आरती पूजा ते आया करो सोहने गुरां जी दे दर्शन पाया करो।।

1.   चन्न जेहा मुखड़ा ते सोहनी जेही चाल ए।
        नीवाँ नीवाँ चोला नाले गल विच हार ए।
            सीस ते रुमाल ए, आके तिलक लगाया करो। सोहणे---।।
2.   ढोलकी वजावां नाले चिमटा वजावाँ।
        दर तेरे आके सोहने भजन वी गावाँ।
            मेरे नाल ताल मिलाया करो, सोहणे----।।
3.   जेहड़े तेरे दर उत्ते रोज-रोज आंदे ने।
        आके सोहने शाम जी दे दर्शन पाँदे ने।
            गुराँ जी दी महिमा गाया करो, सोहणे----।।
4.   दासनदासी मैं वी दर तेरे आई हाँ।
         श्रद्धा ते प्रेम दे पुष्प लै आई हाँ।
             चरणाँ च शीश झुकाया करो, सोहणे----।।

Saturday, August 6, 2016

गुरुदेव न जाओ छोड़ हमें, तुम बिन कैसे रह पायेंगे।

  तर्ज़-बाबुल की दुआएं-----।
    टेक-गुरुदेव न जाओ छोड़ हमें, तुम बिन कैसे रह पायेंगे।
        इस विरह व्यथा को हे गुरुवर हम सब कैसे सह पायेंगे।

    1.  पाकर सानिध्य तुम्हारा प्रभु हमको आनन्द अपार हुआ।
            श्री मुख मण्डल को देख देख मेरा सपना साकार हुआ।
               सत्संग की बहती धारा में हम भूल गये तुम जाओगे।

    2.  भक्ति हो मेरे इस तन में हो भक्ति भाव मेरे मन में।
            भक्ति की धारा रग रग में भक्ति हो पूरे जीवन में।
               आस लगाये बैठे हैं प्रभु यह वर तुमसे पायेंगे।

    3.  करूणामय करूणा के सागर करूणा कर दो हम हैं बालक।
            यह अर्ज़ हमारी तुमसे है जल्दी आना मेरे प्रतिपालक।
               हम  नैन बिछाये बैठेंगे तुम याद बहुत ही आओगे।

Tuesday, August 2, 2016

आना घर मेरे आना आके मुझे दर्श दिखाना।

तर्ज़-जानां ओ मेरी जानां----।
टेक-आना घर मेरे आना आके मुझे दर्श दिखाना।
     प्यासा हूं मैं प्यासा आके मेरी प्यास बुझाना।।

1.   नयना हैं व्याकुल और राह तेरी निहारूँ।
        दूर है मन्ज़िल तुझको कहां पुकारूँ।।

2.   भटका हूँ बहुत और न भटकाना।
        जग ने सताया है तू तो न सताना।।

3.   सूरत दौलत शोहरत न तुझसे चाहूँ।
        प्यार भक्ति और तेरे दर्श गुरु पाऊं।।

4.   तेरा यह प्यारा रूप नयनों में बसाके।
        मस्त हुआ ""प्रेमी'' तुझे पलकों में छुपा के।।

Friday, July 29, 2016

तर्ज़-क्या करते थे साजना-----।

तर्ज़-क्या करते थे साजना-----।
टेक-चरणों की भक्ति दो प्रभु दया की दृष्टि करके।
    हम तो हुज़ूरी में सदा ही ये भीख माँगा करते हैं।।
      तेरी सेवा और साधना में लीन रहकर।
      नाम तेरा दिल में बसाकर जीवन गुज़ारा करते हैं।।
1.लागी जो तुझसे लगन ये हमारी।
   नयनन समाई सूरत ये प्यारी।
    निशदिन ही गायें महिमा तुम्हारी।
     पलकों से झाड़ें राह तिहारी।
      तुझको सजन करके नमन प्यार तेरा जो पाये हम।
       बस याद तुझे करते हैं।जीवन गुज़ारा करते हैं।।

2.तुम ही हो सच्चे मीत हमारे।
   सब जग के ओ पालनहारे।
    तुझ संग बाँधी प्रीत की डोरी।
     नैय्या हमारी तेरे सहारे।
      कुर्बान दिलकुर्बान हमहो करके तुझमें सदा ही मगन
       बस तुझको पुकारा करते हैं जीवन गुज़ारा करते हैं।

Monday, July 25, 2016

तेरे दर पे मैं आ ही गया तेरे दर्शन को पाने को।

तर्ज़-मुझे पीने का शौक नहीं----.
टेक-तेरे दर पे मैं आ ही गया तेरे दर्शन को पाने को।
     प्यार चरणों का पाने को ते दर्शन को पाने को।।

1.आँखों में नज़ारों ने नई रोशनी दिखलाई।
    आया जब हुज़ूरी में सुख शान्ति है पाई।
      और खुद को भुला डाला पाके भक्ति खज़ाने को।।

2.खुशियों से भरा यह दिल जिसका ही नहीं है हिसाब।
    पाके दौलत तेरे दीदकी भरगई दिल की कोरी किताब।
      प्यास जन्मों कीअब है मिटीमिली शमा परवाने को।।

3.अब आते न चरणों में हम मौजों की रवानी में।
    बहुत भारी खता करते डूबते गहरे पानी में।
     अब तो बाकी है यह ज़िन्दगी नाम तेरा ही ध्याने को।।

4.गुरु रखना दया की नज़र अपने चरणों में दीजे जगह।
   भटके ना यह सुरति मेरी सुनो सतगुरु यही इल्तेजा।
     गिरता हूँ उठा लेना इस ""प्रेमी'' दीवाने को।।

Friday, July 22, 2016

तेरा हर इक कम्म है कमाल दा। दुनियाँ बनान वालेया।

टेकः-तेरा हर इक कम्म है कमाल दा। दुनियाँ बनान वालेया।
     कोई वेखया न होर तेरे नाल दा। दुनियाँ बनान वालेया।।

1.   बदलाँ विच डोलदा ते लहरां विच डोलदा।
          तारेंयां च वसदा ते फुल्लां विच हसदा।
               हर वस्तु विच जलवे विखावंदा।।
2.   डुबदे बेड़यां नूं कण्डे उत्त्ते लावें तूं।
          अग्ग दे अँगारेयां चों आन के बचावें तूं।।
               तूं ते पानी विच दीवयां नूं बालदा।।
3.   जगह जगह सूरज ते चन्न दीयां लोवां ने।
          जगमग लाई होई जग उत्ते दोवां ने।।
               तू है पत्थरां च जीवयाँ नूं पालदा।।
4.   कारीगरी अपनी तूं सबनूं विखाई ऐ।
          सब विच वस्स के शक्ल लुकाई ऐ।।
               ओ तैनू सारा ही जमाना फिरे भालदा।।


Monday, July 18, 2016

-कुछ सोच समझ इन्सां क्यों तू इस दुनियां में आया।

तर्ज़--चल उड़ जा रे पँछी----।
टेक--कुछ सोच समझ इन्सां क्यों तू इस दुनियां में आया।
1.   बालापन तूने खेल गँवाया मौज़ में बीती जवानी।
        वृद्ध हुआ तन थर थर कांपे कौन करे निगरानी।
           हाय हाय अन्त में तेरी बीत गई जिन्दगानी।
              फिर भी तू सोया गफलत में और सँभल न पाया।।

2.   रिश्ते झूठे नाते झूठे झूठे से तू प्यार करे। 
        मतलब के वो संगी साथी जिनका तू एतबार करे।
           साथ न देंगे तेरा जिनकी चिन्ता बारम्बार करे।
           अन्त समय में किसने किसका जग में साथ निभाया।।
3.   दिन दिन घटती आयु तेरी तू कहता मैं जवान हुआ।
        काल खड़ा है सर पे तेरे ऐसा क्यों नादान हुआ।
           जो है बचाता काल भँवर से उससे क्यों अन्जान हुआ।
              कैसे होगी मुक्ति तेरी अब तक न गुण गाया।।

4.   जब मिल जाये सतगुरु पूरा हर मुश्किल आसान करे।
        जन्म जन्म के तोड़ के बन्धन प्रगट में भगवान करे।
           सूने जगत जीवन पे तेरे सतगुरु ही एहसान करे।
              समझ गया है वो ही बन्दा गुरु शरण जो आया।।

Friday, July 15, 2016

टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।

तर्ज़--मिलती है ज़िन्दगी मे----।
        टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।
                कदमों में उनके अपना सब कुछ लुटा के देख।।
        1.        तेरी सूनी ज़िन्दगी में आ जायेगी बहार।
                तस्वीर सतगुरु की दिल में बसा के देख।।
        2.        सतगुरु की मौज में ही रहने में है भला।
                जिन्दगी को उनकी मौज मुताबिक बना के देख।।
        3.        तेरे रास्ते की सारी टल जायेंगी बला।
                राहे मारफत में उनको राहबर बना के देख।
        4.        तेरे दिल की दुनियाँ होगी नूरे मारफत से रोशन।
                दुई का पर्दा अपने दिल से उठा के देख।।
        5.        दुनियाँ के रंज़ो गम से तू पायेगा निज़ात।
                तसव्वर में सतगुरु के खुद को भुला के देख।।
        6.        सोहबत में आरिफों की मिलता है सुख हकीकी।
                महफिल में उनकी बन्दे इक बार आ के देख।।
        7.        हमदर्द जीव के हैं फक्त सतगुरु जहान में।
                कदमों में उनके अपने दिल को लगा के देख।।
        8.        सतगुरु हैं मेहरबां ते सब जग है मेहरबाँ।
                तू उनको दास अपना मेहरबाँ बना के देख।।

Wednesday, July 13, 2016

दिन खुशियां दा आया है हज़ूर दातिया,

तर्ज- रहे बखशदां तू किथे होवे
मुखड़ाः- दिन खुशियां दा आया है हज़ूर दातिया,
अज यह दिन मनावेंगे हज़ूर दातिया


1    देवां सबनॅूं वधाई मैं शुभ दिन दी, देवां सबनूं वधाई मैं दर्शन दी
सारी संगत हैं आईयां बड़ी दूरों दातिया, आज यह दिन--

2    चरणां विच तेरे सारे सुख बसदे, चारों पासे अज तेरी मेहर बरसे
इको अर्ज़ है मेरी ए हज़ूर दातिया, आज यह दिन--

3    अखां विच मेरे दरस वसदे, प्यार तेरे दा मिहं बरसे
मेरी विनती करीं तू मन्ज़ूर दातिया, आज यह दिन--

4    दरस तेरे नू सब तरसें, प्यास जगी मन विच सब दे
रहंदा अंखा विच मेरी तेरा नूर दातिया, आज यह दिन---

5    जे किृपा ते मेहर मिल जाए तेरी, खुशियां तों झोली भर जाए मेरी
दुख किते है न सब दे दूर दातिया, आज यह दिन--

Sunday, July 10, 2016

श्री दर्शन भजन सुमरण ध्यान लगाऊं तुम्हारा

तर्ज़ः-   अकले हैं चले आओ
मुखड़ाः- श्री दर्शन भजन सुमरण ध्यान लगाऊं तुम्हारा
यही जीवन का मक्सद हो हमारा

1    तुम्हीं आँखों की ठंडक, जिगर का सहारा
वैकन्ठों से भी बढ़कर, तेरा दीदार प्यारा--श्री दर्शन

2    करे जीवन को उजज्वल, तुम्हीं वो रोशनी हो
जो आकर फिर न जाए, वही साची खुशी हो--

3    तुम्हें दिल में बसाकर, नैयन से नीर बहाऊॅं
ये दासन दास चाहे, प्रभू तुझ को रीझाऊं।

Tuesday, July 5, 2016

मुखड़ाः- मेरे साहिबा मुझे अपनी, शरण में सदा रखना



मैं लज पाला....
मुखड़ाः- मेरे साहिबा मुझे अपनी, शरण में सदा रखना
मेरे सिर पर सदा अपनी, प्यार की एक नज़र रखना
मेरे जीवन की नइया को प्रभू जी पार तू करना--मेरे साहिबा

1    
तू सुनता है पुकारों को, जो ह्नदय से निकलती हैं
अर्जियां लेकर मैं आया हूँ, मेरे मालिक दया करना

2    
यूं तो हर कोई लेता है, सहारे अपने लोगों के(दुनिया वालों के)
मेरा तो एक सहारा तू, मुझे अपनी शरन रखना

3    
जहां देखूं वहां तुम हो, मुझे ऐसी नज़र दे दो
मेरे मन में मेरे दिल में, सदा तुम ही बने रहना,

4    
दास मुझको है डर किसका, मेरा है पीर लासानी
मेरे मुर्षीद मेरे मालिक, मेरे सिर हाथ तुम रखना
सदा ही पास तुम रखना, सदा तुम साथ में रहना

Saturday, July 2, 2016

लब पे रहेगा तेरा नाम ओ सतगुरु, आख्रिी दम तक

मुखड़ाः-  लब पे रहेगा तेरा नाम ओ सतगुरु, आख्रिी दम तक
आख्रिी दम तक-2 अगले जन्म तक,
अगल जन्म नहीं जन्म जन्म तक

1आपने मुझको काग से हसं बना डाला
एसा पिलाया, अमृत रस का वो प्याला
पड़ता रहेगा तुम से काम, ओसतगुरु

2      आपने ही तो प्रेमी मुझे बनाया है
जग में कैसे रहूंॅ ये भी तो सिखाया है
नहीं भुलूंगी अहिसान, ओ सतगुरु

3तेरे प्यार ने मेरी होंष गवांई है
भटिकी सुरती चरणों संग लगाई है
यादि आयेगी सुबह षाम, ओ सतगुरु

Tuesday, June 28, 2016

मेरे मन में हुआ उजाला, सतगुरू दर्शन से

मेरे मन में हुआ उजाला, सतगुरू दर्शन से
मैने पाया सुख निराला सतगुरू दर्शन से--दर्शन से गुरू दर्शन से
1    कैसा सुन्दर शुभ दिन आया, सतगुरू ने चरणों में बुलाया
हुई शान्त ये मन की ज्वाला, सतगुरू दर्शन से--दर्शन से
2    जन्म जन्म की भूखी प्यासी, बिन पानी ज्यों मीन उदासी
अब मिल गया अमृत प्याला, सतगुरू दर्शन से--दर्शन से
3    आज खुशी से झूमूं गाऊॅं, दिल की हालात किसे सुनाऊॅं
हुआ रोम रोम मतवाला.सतगुरू दर्शन से--दर्शन से
4    प्रेमी इस दर पे बलिहारी, सतगुरू ने की रहमत भारी
मेरी किस्मत का खुल गया ताला, सतगुरू दर्शन से--दर्शन से

Sunday, June 26, 2016

मुखड़ो: अवल करियां थो चरन निमाम; सतगुर दाता पूरन काम


तर्ज़ः  अवल निमायां सिरु गुरुदेव
मुखड़ो:  अवल करियां थो चरन निमाम; सतगुर दाता पूरन काम
 सतगुर दाता पूरन काम; कष्ट कटींदड़ सुखन जा धाम

1    आउं निमाणो तूं ईं प्रभू माणु; आउं निताणो तूं ईं प्रभू ताणु
आउं भुलयलु तूं बखष्णहार आउं पापी तूं पतति उधार

2    दुष्ट पंजई कनि कहरी काह; तिन खां बचाइजि षाहनषाह
नाहे हिम्मथ ऐं नाहे होंष;ठकु ठकिज तूं पड़दे पोष

3    तो बिन मुहिंजो कोन्हे हालु; तूं त पिता मां तुहिंजो बा्लु;
छा त कंदो तहिं कहिरी काल; रक्ष्क जहिंजो दीन दयाल

4    आंउ दासन दास तो दर ते; दूर करे छदि् दुख दर्द खे
हकूं नाहकूं रखु तूं राम; षरन अव्हां जे आहिंया ष्याम

Wednesday, June 15, 2016

टेक- तेरे नाम मे लगी हो इतनी लगन।

तर्ज़-मेरे प्यार की उमर हो-----।
शेयर-मिल करके सतगुरु तुम्हे खुश खूब हो गया हूँ।
      दुनियाँ की सारी दौलत दाता मैं पा गया हूँ।
       बख्शा मुझे खज़ाना अपने ही नाम का जो।
        उसको जपूँ हमेशा विनय ये कर रहा हूँ।
टेक- तेरे नाम मे लगी हो इतनी लगन।
       तेरे नाम में जीऊँ तेरे नाम में खतम।।
1.   नाम में तेरे दाता यूं खो जाऊं मैं।
       चारों तरफ बस तुझको ही पाऊँ मैं।
         तेरी प्रीत में बढ़ती रहे मेरी लगन।।

2.   मेरी सुरति स्वामी तुझ संग जुड़ी रहे।
       सब से सिमट कर तेरी ओर मुड़ा रहे।
         गुण गाऊं नाथ मैं तेरे ही हरदम।।

3.   इक टक छवि ये तेरी पल भर निहारूँ मैं।
       प्यारा तेरा नाम भगवन सदा ही उचारूं मैं।
         तेरी सेवा में हाज़िर है ये जानो तन।।

4.   प्रेमी ये तेरा प्रभु तुझ पे कुर्बान है।
       सब कुछ मिला है बस एक अरमान है।
         तेरे चरणों में अन्त समय निकले मेरा दम।।

Saturday, June 11, 2016

टेक--तेरा नाम प्रभु जो ध्याये।

तर्ज़--तेरा मन दर्पण कहलाये-----।
            टेक--तेरा नाम प्रभु जो ध्याये।
            जन्म जन्म की मोह ममता से निश्चय छूट वह जाये।।

1.            एक रत्ती भी नाम तेरे की जिस  घट में बस जाये।
                तम अज्ञान विनाशे सारा सुख साचा वह पाये।
                 घास के सूखे ढेर को जैसे ज़रा सी आग लगाये।।


 2.            जग सारा है खादिम उस का जिसका तू हो जाये।
                 छोड़ भरोसा औरों का जो तुझ से लौ लगाये।
                  दुनियाँ बेशक चाहे उसको पर वह तुझको चाहे।।

 3.            नाम की अदभुत महिमा तो सब सन्तों ने है गाई।
                 नाम बिना भव सागर तरना महाकठिन है भाई।
                  नाम से ही उज्जवल मुख होवे ठोकर कभी न खाये।

4.            दासन दासा नाम बिना झूठे हैं धन्धे सारे।
               नाम है तेरी अपनी पूँजी सोच समझ ले प्यारे।
               लोक परलोक का संगी साथी निज घर दे पहुँचाये।।

Thursday, June 9, 2016

टेक--मेरे दिल में तेरी भक्ति को पाने की तमन्ना है।

तर्ज़--न झटको जुल्फ से पानी--।
टेक--मेरे दिल में तेरी भक्ति को पाने की तमन्ना है।
     मेरे मुर्शिद तुझे अपना बनाने की तमन्ना है।।

1.   ये सिर तेरी अमानत है झुकेगा क्यों कहीं जाकर।
     इसे तेरे ही कदमों में झुकाने की तमन्ना है।।

2.   मुझे थी जुस्तजू जिसकी वह दाता तुम्हीं तो हो।
     तुम्ही को दिल के आसन पर बिठाने की तमन्ना है।।

3.   श्री चरणों में भक्ति प्रेम के दरिया मचलते हैं।
     श्री चरणों के सागर में नहाने की तमन्ना है।।

4.   बिछाया जो ना था अब तक किसी के सामने हरगिज़।
     वही दामन तेरे दर पर बिछाने की तमन्ना है।।

Tuesday, June 7, 2016

मेरे सतगुरु प्यारे का जलवा ही निराला है।

टेकः-मेरे सतगुरु प्यारे का जलवा ही निराला है।
     अम्बर का सूरज है, धरती का उजाला है।।

1.   तुम सामने होते हो फिर दूरी नहीं होती।
        दीदार की हसरत क्यों फिर पूरी नहीं होती।।
            तू कैसा जादूगर सतगुरु मतवाला है।।
2.   तुम पास नहीं होते फिर गम आ जाता है।
        तेरी याद में सतगुरु जी दिल शांत हो जाता है।
            कोई क्या जाने कैसे मैने दिल को सँभाला है।।
3.   हर घड़ी मेरी बीते सतगुरु तेरे चरणों में।
        दिल ऐसा लगे मेरा प्रभु तेरे दर्शन में।
            दिन रात पिता बनकर तूने मुझको सँभाला है।।
4.   त्रैलोकी के मालिक सब के रखवाले हो।
        तुम दास के स्वामी हो जग तारनहारे हो।
            समझेगा वही गुरुमुख जो समझने वाला है।।


Saturday, March 26, 2016

रंग दो जी मुझे अपने रंग में तमन्ना बड़ी ये कब से।

तर्ज़--तेरे चेहरे से-----।
टेक--रंग दो जी मुझे अपने रंग में तमन्ना बड़ी ये कब से।
जो न उतरे कभी भी ऐसा चढ़ाना रंग मुझ पे।।

1. तुमने लाखों को रंग डाला।
देकर अपना रंग निराला।
तेरी रहमत को सुन करके।
आया मैं सवाली बन के।।
2. जन्मों की बिगड़ी बन जाती।
जिसपे तेरी किरपा हो जाती।
गीत तेरे सदा वो गाये।
बलिहारी जाये तुझ पे।।
3. रंगरेज़ तू है बड़ा महान।
फैली है महिमा सारे जहान।
जन्मों का मैला मन भी।
रंग देते इक पल में।।
4. दास पे भी ज़रा रहमत कर दो।
अपने प्रेम के रंग में रंग दो।
करो विनती मेरी मन्ज़ूर।
          चरणों पे जाऊँ सदके।।

Thursday, March 24, 2016

तेरी रहमत से प्रभुवर, मिल गई मन्ज़िल मुझे।

तर्ज़-आपकी नज़रों ने समझा-----।
टेक-तेरी रहमत से प्रभुवर, मिल गई मन्ज़िल मुझे।
 खुशनसीबी से मिले जब, पीर तुम कामिल मुझे।।

1. क्यों फिरूँ अब मारा मारा, झूठे जग के प्यार में।
मिल गई है शरण मुझको, आप के चरणार में।
अब फँसायेगी भला क्या, माया की दलदल मुझे।।
2. नाव मेरी तो प्रभु जी, अब हवाले है तेरे।
कैसा डर तूफानों का जब हो खेवैया तुम मेरे।
अब तो मिल ही जायेगा, खुद-ब-खुद साहिल मुझे।।
3. राहे-भक्ति पर चलूं मैं , झूठे जग से तोड़ के।
सदा ही रखूं तार दिल की, श्री चरणों से जोड़ के।
अपने दीवानों में करना, है प्रभु शामिल मुझे।।
4. मेरे सिर पे तुम धनी हो, फिर भला कैसा फिकर।
गाऊँ महिमा तेरी हरदम, और करूँ तेरा ज़िकर।
एक पल भी दृष्टि से न, करना कभी ओझल मुझे।।
5. दासा तन मन और चित्त से, कर प्रभु आराधना।
इसके सिवा दिल में तेरे, रहे न कोई कामना।

Wednesday, March 23, 2016

-परमहँसों की दिव्य ज्योति से रोशन हुआ जहान।


तर्ज़--देख तेरे संसार की------.
टेक--परमहँसों की दिव्य ज्योति से रोशन हुआ जहान।
ये हैं परम पुरुष महान।।

1. प्रेम भक्ति का पथ दर्शाया बिछुड़ी रुहों को है मिलाया।
श्री चरणों में दिया हमें है श्री सतगुरु ने स्थान।।

2. नाम का खोल दिया भण्डार घर घर फैला है प्रचार।
आरती पूजा सेवा सत्संग करो भजन व ध्यान।।

3.मिला हैदुर्लभ तनइन्सानी इसकी कदर तू करले प्राणी।
सन्त शरण में आकर के तू कर आत्म कल्याण।।

4.ज्ञानकीज्योति ह्मदय भरलोसुखमय जीवनअपनाकर लो।
खोल दिखाया घट भीतर जो आनन्द सुख की खान।।

5.सतपुरुषोंकी सुनले वाणी उसपरअमल तू करले प्राणी।
दासन दास तू कर दे अपना तन मन धन कुर्बान।।

Monday, March 21, 2016

दिल के चमन में फिर से छा गई खुशहाली।

तर्ज़--बाजरे दा सिट्टा----।
टेक--दिल के चमन में फिर से छा गई खुशहाली।
  आ गया है घर में कुल दुनियाँ का वाली।।
1. व्याकुल दिलों की पीर मिटाई देकर सुन्दर दर्शन।
रहमत का मेंह बरसाकर कर दिया शीतल तन मन।
  चरणों पे जाऊँ वारी मिटा दी दुविधा सारी।
   विरह में डूबी मेरी नैया आकर के बचा ली।।
2. आज मुबारकबाद हो सबको प्रीतम घर में आये।
अपने संग साथ में है नई बहारें लाये।
 गीत खुशियों के गायें धन धन भाग मनायें।
  आ गई है फिर से घर में आज दीवाली।।
3. रहमत का सागर मौज़ में आकर हुआ दयाल।
रंक को इक पल के अन्दर कर दिया मालामाल।
 क्या उपकार सुनाऊँ बदला कैसे चुकाऊँ।
    अपनी इस बगिया की करने आये खुद रखवाली।
4. धन धन मेरे प्रीतम प्यारे धन धन आपकी महिमा।
तुझसा दयावान दुनियाँ में देखा और कहीं ना।
  पर उपकार की खातिर लाखों कष्ट उठाकर।
   अपनी बिछुड़ी रुहें आकर के सँभाली।।

Saturday, March 19, 2016

-भक्ति प्रेम और सच्चे सुख का ये है केन्द्र महान

तर्ज़--देख तेरे संसार------।
टेक--भक्ति प्रेम और सच्चे सुख का ये है केन्द्र महान।
सज्जनों श्री आनन्दपुर स्थान।।

1.शान है इसकी अजब निराली खूब सजा दरबार हैआली।
  जो भी आवे बन के सवाली जाये न वह हरगिज़ खाली।
    श्रद्धा भाव से जो भी आवे पावे सच्चा मान।।

2. श्री मन्दिर का भव्य नज़ारा लगता कैसा प्यारा प्यारा।
   बहती प्रेम अमृत की धारा सुख शान्ति का चले फव्वारा।
         प्रेमी जन हैं मज्जन करते गाते हैं गुण गान।।

3.भक्तों का आधार बना है मुक्ति का यह द्वार बना है।
  खुशियों का आगार बना है दुखियों का गमख्वार बना है।
       गम का मारा जीव जो आवे पावे सुख महान।।

4. क्यों न अपने भाग मनायें दर्शन पायें शीश झुकायें।
   दासा चरणों पे बलिबलि जायें तनमन धन सब भेंट चढ़ायें।
दीन भाव से जो भी आवे पावे भक्ति दान।।

Friday, March 18, 2016

नाचें गायें खुशियाँ मनायें

तर्ज़--प्यासे पंछी नील गगन--------।
टेक--नाचें गायें खुशियाँ मनायें शुभ सन्देश है आया।
     सद बलिहारी उस पे जायें पैगाम खुशी का जो लाया।।

1.बड़ी मुद्दत से आस लगी थी श्री दर्शन पाने की।
    मिलकर देवो सभी मुबारिक प्रीतम के आने की।
    ज्यों ही खबर पड़ी कानों में मेरा रोम रोम हर्षाया।।

2.महक उठा है दिल का उपवन सुन प्रीतम का आना।
 कल आयेंगे सतगुरु मेरे गाओ खुशी का तराना।
      मिला मुझे अपार है सुख वो ज़ुबाँ से न जाये बताया।।


3.सूनी सूनी गलियों में फिर से छायेंगी बहारें।
 जीवन में नव प्राण आयेंगे मिलेंगे प्राण प्यारे।
       मिट जायेगी सब गम चिन्ता पाकर निर्भय छाया।।

4.कल आयेंगे सतगुरु मेरे हम पर उपकार कमाने।
 देकर प्यारा प्यारा दर्शन अपना दास बनाने।
  देखे नहीं अवगुण हमारे याद हमें फरमाया।।

Tuesday, March 15, 2016

दयालु मिले न तेरे नाल दा।

तर्ज़--मेरा साजन उस पार है...।
टेक--दयालु मिले न तेरे नाल दा।
        तेरे नाल दा-----2.

1.   तेरे रंग न्यारे दाता भेद ना जाने कोई।
        सन्त रूप विच प्रगट होये दुनियाँ धन धन होई।
           सुनो जी बख्शनहारे मैं आया तेरे द्वारे।।

2.   चुम चुम रखाँ मूरत तेरी नाल मत्थे दे लावां।
        तेरे इस सुन्दर मुखड़े नूँ फूल्लां नाल सजावां।
           तेरी मैं आरती गावां सुबह और शाम मनावां।।

3.   दिल मेरे दी बस्ती अन्दर तेरा रैन बसेरा।
        ऐ दुःखभञ्जन मैंनूं सहारा तेरा।।
           पुजारी बन के आया मैं रज रज दर्शन पाया।।

4.   मनमानियां मैं बहुत कीतियाँ तेरा नाम भुला के।
        चौरासी विच फँसिया बन्दा काम क्रोध विच आके।
           अजब है तेरी माया दास नूँ पार लगाया।।