Monday, August 22, 2016

बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।

तर्ज़--पूजो पूजो रे प्रेमियों-------।
टेक--बाँधो बाँधो रे प्रेमियों सतगुरु को तुम राखी।
बाँधा जिसने भी प्रेम का धागा रे-2 ।
उसकी रक्षा करेंगे बन के साथी।।   

1. पक्का धागा ऐसा बाँधो डोर न टूटने पाये।
    हर संकट से उनको बचाते जो शरण में आये।
    बाँधा जिसने भी-------।।
   
2. प्रेम का धागा बाँधो भाई आज है राखी आई।
    सतगुरु को हमराज़ बना लो जो लोक परलोक सहाई।
     बाँधा जिसने भी-------।।

3. बहना जैसी प्रीत तू रखना सतगुरु संग ऐ दासा।
   भ्रातः जैसा नेह रखेंगे तुम संग सतगुरु दाता।
    बाँधा जिसने भी-------।।

4. सतगुरु तेरा राहबर साचा सबके हैं हितकारी।।
    बाँध के डोरी सतगुरु को तू सौंप दे ज़िम्मेवारी।
    बाँधा जिसने भी--------।।

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