तर्ज़-दिल दा मामला है-----।
टेक-तेरा ही आसरा है तेरा ही आसरा है।
कुर्बान जानों तन प्रभु जी तुम्हारे वास्ते हर वक्त तरसे मन।।
1.मैं हूँ तेरा पुजारी तेरे दर का भिखारी।
माया से ठोकर खाके आया मैं शरण तिहारी।
तेरा सच्चा द्वारा मुझको देना सहारा।
बिगड़ी बनाये पल में तेरा बस एक इशारा।
तेरे बिन कौन सुनेगा ये दिल का दर्द हमारा।
हो पीड़ा हरो सजन तेरा ही आसरा है।।
2.मेरी है जान तू ही धर्म ईमान तू ही।
दिल में बसा के रखूँ मेरा भगवान तू ही।
तेरा ही सब कुछ स्वामी मान अभिमान तू ही।
मेरा मुझमें कुछ नहीं जो किछु है सो तोय।
तेरा तुझको सौंप दूँ क्या लगेगा मोय।
मेरी है शान तू ही मेरी ज़ुबान तू ही।
जीवन के इस कमरे का मालिक मकान तू ही।
मुर्दों में जान जो फूँके ऐसी मुस्कान तू ही।
हो तुझसे लगी लगन तेरा ही आसरा है।।
3.तेरा दीवाना हूँ मैं तेरा मस्ताना हूँ मैं।
शमां पे जो मिट जाये वही परवाना हूँ मैं।
तुझपे सब कुछ लुटा दूँ और खुद को मिटा दूँ।
सब कुछ है तेरा प्रभु चरणों में भेंट क्या दूँ।
तू है सुख का समुन्दर नन्हा सा मैं कतरा हूँ।
हो चाहूँ तेरा करम तेरा ही आसरा है।।
टेक-तेरा ही आसरा है तेरा ही आसरा है।
कुर्बान जानों तन प्रभु जी तुम्हारे वास्ते हर वक्त तरसे मन।।
1.मैं हूँ तेरा पुजारी तेरे दर का भिखारी।
माया से ठोकर खाके आया मैं शरण तिहारी।
तेरा सच्चा द्वारा मुझको देना सहारा।
बिगड़ी बनाये पल में तेरा बस एक इशारा।
तेरे बिन कौन सुनेगा ये दिल का दर्द हमारा।
हो पीड़ा हरो सजन तेरा ही आसरा है।।
2.मेरी है जान तू ही धर्म ईमान तू ही।
दिल में बसा के रखूँ मेरा भगवान तू ही।
तेरा ही सब कुछ स्वामी मान अभिमान तू ही।
मेरा मुझमें कुछ नहीं जो किछु है सो तोय।
तेरा तुझको सौंप दूँ क्या लगेगा मोय।
मेरी है शान तू ही मेरी ज़ुबान तू ही।
जीवन के इस कमरे का मालिक मकान तू ही।
मुर्दों में जान जो फूँके ऐसी मुस्कान तू ही।
हो तुझसे लगी लगन तेरा ही आसरा है।।
3.तेरा दीवाना हूँ मैं तेरा मस्ताना हूँ मैं।
शमां पे जो मिट जाये वही परवाना हूँ मैं।
तुझपे सब कुछ लुटा दूँ और खुद को मिटा दूँ।
सब कुछ है तेरा प्रभु चरणों में भेंट क्या दूँ।
तू है सुख का समुन्दर नन्हा सा मैं कतरा हूँ।
हो चाहूँ तेरा करम तेरा ही आसरा है।।
No comments:
Post a Comment