Thursday, August 18, 2016

क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।

तर्ज़--    कोई जब राह न पाये------।
टेक--    क्यों न वो भाग मनाये शरण में जो आये।
    कि तुझ से नेह लगाये, पाये वही धन सार।।
  
1.    पाकर तेरा साचा प्यार।
      नाश होवे मोह का अंधियार।
        भूल जाये उसको संसार।
        तेरे ही गुण गाये न और कुछ चाहे।।
  
2.    कंगले से होवे धनवान।
      प्रीत तेरी का पीकर जाम।
        दुनियाँ से फिर क्या उसको काम।
        तन मन तुझ पे लुटाये कि तेरा बन जाये।।
  
3.    दासा सतगुरु हैं सुखधाम।
      कैसा प्यारा प्यारा है नाम।
        सबसे ऊँचा है इनका धाम।
        निज घर को वह पाये जो आप मिटाये।।

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