Tuesday, August 2, 2016

आना घर मेरे आना आके मुझे दर्श दिखाना।

तर्ज़-जानां ओ मेरी जानां----।
टेक-आना घर मेरे आना आके मुझे दर्श दिखाना।
     प्यासा हूं मैं प्यासा आके मेरी प्यास बुझाना।।

1.   नयना हैं व्याकुल और राह तेरी निहारूँ।
        दूर है मन्ज़िल तुझको कहां पुकारूँ।।

2.   भटका हूँ बहुत और न भटकाना।
        जग ने सताया है तू तो न सताना।।

3.   सूरत दौलत शोहरत न तुझसे चाहूँ।
        प्यार भक्ति और तेरे दर्श गुरु पाऊं।।

4.   तेरा यह प्यारा रूप नयनों में बसाके।
        मस्त हुआ ""प्रेमी'' तुझे पलकों में छुपा के।।

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