तर्ज़-बाबुल की दुआएं-----।
टेक-गुरुदेव न जाओ छोड़ हमें, तुम बिन कैसे रह पायेंगे।
इस विरह व्यथा को हे गुरुवर हम सब कैसे सह पायेंगे।
1. पाकर सानिध्य तुम्हारा प्रभु हमको आनन्द अपार हुआ।
श्री मुख मण्डल को देख देख मेरा सपना साकार हुआ।
सत्संग की बहती धारा में हम भूल गये तुम जाओगे।
2. भक्ति हो मेरे इस तन में हो भक्ति भाव मेरे मन में।
भक्ति की धारा रग रग में भक्ति हो पूरे जीवन में।
आस लगाये बैठे हैं प्रभु यह वर तुमसे पायेंगे।
3. करूणामय करूणा के सागर करूणा कर दो हम हैं बालक।
यह अर्ज़ हमारी तुमसे है जल्दी आना मेरे प्रतिपालक।
हम नैन बिछाये बैठेंगे तुम याद बहुत ही आओगे।
टेक-गुरुदेव न जाओ छोड़ हमें, तुम बिन कैसे रह पायेंगे।
इस विरह व्यथा को हे गुरुवर हम सब कैसे सह पायेंगे।
1. पाकर सानिध्य तुम्हारा प्रभु हमको आनन्द अपार हुआ।
श्री मुख मण्डल को देख देख मेरा सपना साकार हुआ।
सत्संग की बहती धारा में हम भूल गये तुम जाओगे।
2. भक्ति हो मेरे इस तन में हो भक्ति भाव मेरे मन में।
भक्ति की धारा रग रग में भक्ति हो पूरे जीवन में।
आस लगाये बैठे हैं प्रभु यह वर तुमसे पायेंगे।
3. करूणामय करूणा के सागर करूणा कर दो हम हैं बालक।
यह अर्ज़ हमारी तुमसे है जल्दी आना मेरे प्रतिपालक।
हम नैन बिछाये बैठेंगे तुम याद बहुत ही आओगे।
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