तर्ज़--बड़ा बेदर्द जहाँ है ये----।
टेक--प्रभु जी हमें भूल न जाना कर्म इतना फरमाना।
जैसे भी हो सके तो जल्दी ही आना।।
1. तुमसे बिछुड़ कर मेरे प्रीतम दिल को चैन न आये।
हर समय दुःख गम के बादल रहते दिल पे छाये।
दर्श की प्यासी आँखें हर पल पल ये तड़पें।
मुश्किल हो जाता है इक पल बिताना।।
2. तुम बिन सूनी सूनी लगती नगरी श्री आनन्दपुर की।
विरह अग्नि सी बढ़ जाती है पीर मेरे ह्मदय की।
लगे सब ओर अन्धियारा सूझे न कोई किनारा।
दुखी दिल को प्रभु धीर बँधाना।।
3. दिल का हाल सुनाऊँ किसको तुम बिन कौन है मेरा।
तुम संग ही बहारें मुझको जीवन में भी उजेरा।
सुन लो दिल की पुकार मेरे दयालु दातार।
अपने विरद की लाज बचाना।।
4. करुणा के सागर मेरे स्वामी जल्दी देना दीदार।
आपके श्री चरणों में दास की अर्ज़ ये बारम्बार।
न देखना मेरे अवगुण करना ये रहमत भगवन।
प्यासी अँखियों की प्यास बुझाना।।
टेक--प्रभु जी हमें भूल न जाना कर्म इतना फरमाना।
जैसे भी हो सके तो जल्दी ही आना।।
1. तुमसे बिछुड़ कर मेरे प्रीतम दिल को चैन न आये।
हर समय दुःख गम के बादल रहते दिल पे छाये।
दर्श की प्यासी आँखें हर पल पल ये तड़पें।
मुश्किल हो जाता है इक पल बिताना।।
2. तुम बिन सूनी सूनी लगती नगरी श्री आनन्दपुर की।
विरह अग्नि सी बढ़ जाती है पीर मेरे ह्मदय की।
लगे सब ओर अन्धियारा सूझे न कोई किनारा।
दुखी दिल को प्रभु धीर बँधाना।।
3. दिल का हाल सुनाऊँ किसको तुम बिन कौन है मेरा।
तुम संग ही बहारें मुझको जीवन में भी उजेरा।
सुन लो दिल की पुकार मेरे दयालु दातार।
अपने विरद की लाज बचाना।।
4. करुणा के सागर मेरे स्वामी जल्दी देना दीदार।
आपके श्री चरणों में दास की अर्ज़ ये बारम्बार।
न देखना मेरे अवगुण करना ये रहमत भगवन।
प्यासी अँखियों की प्यास बुझाना।।
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