Wednesday, November 2, 2016

छत्रछाया श्री सतगुरु की खुशियों का भण्डार।

तर्ज़-सबसे सुन्दर------।
टेक-छत्रछाया श्री सतगुरु की खुशियों का भण्डार।
        महिमा श्री सतगुरु जी की फैली सब संसार।।
            सदा तेरा प्यार पाऊं, और तुझको ही ध्याऊं।।
1.    निर्मल प्यार है पाया , प्रभु चरण शरण में आके।
        पाया प्रभु अविनाशी, कई जन्मों के भाग हैं जागे।
            पूरा सतगुरु पाया हमने, महिमा जिनकी अपार।।
2.    नाम को जपने वाला, होता है गुरु को प्यारा।
        अन्तर्मुख हो जो रहता , रहता जग से न्यारा।
            ज्ञान की ज्योति जगाते भगवन, गुरु हैं बख्शनहार।।
3.    अनहद नाद सुनाकर, सब कारज करते रास।
        शब्द की है ये कुन्जी, पूरे सतगुरु के पास।
            कई जन्मों के पुण्य करम से पाया है गुरुद्वार।।
4.    भाग हमारे जागे पाये हमने प्रभु प्यारे।
        खुशनसीब हैं सब पाये जो सुन्दर नज़ारे।
            यहाँ मिलेगा ऐसा हमको बिन स्वार्थ का प्यार।।
5.    धन्यवाद गुरु का दासा, शुक्रिया बारम्बार।
        एहसान गुरु का भारा, महिमा है अपरम्पार।
            भक्तों के आधार प्रभु हैं सन्तों के सिरताज।।

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