Thursday, October 27, 2016

इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।

तर्ज़-तुझे सूरज कहूँ या चन्दा----।
टेक-इसे स्वर्ग कहें दुनियाँ का या कहें मोक्ष का द्वारा।
    दुनियाँ जिसे सीस झुकाती वो है दरबार तुम्हारा।।

1.गुरुदेव के दर्शन करना शुभ कर्मों का ही फल है।
  बिन भाग न दर्शन होते समझो यह बात अटल है।
  भगवान ने ही इस युग में लिया परमहँस अवतारा।।

2.प्रेमा भक्ति शान्ति का बस यही एक खज़ाना है।
  मिली सच्ची राहत उऩको जिन्होने इनको माना है।
   श्री मुख से रोज है बहती वचनों की अमृत धारा।।

3.यह परमार्थ का तकिया यह एक दरबार रूहानी।
  है फकीरी भी गोया यहाँ की है तख्ते सुलेमानी।
  छू लेता नील गगन को दरबार का जैकारा।।

4.सेवा सत्संग भजन के उपहार यहां से मिलते।
  पलटे हालत इस मन की अन्तर के पट हैं खुलते।
  जीवन रूपी कश्ती का दासा यही किनारा।।

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