तर्ज़-बहुत प्यार करते हैं-----।
टेक-तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।
रूठे हो तुम जो मनायेंगे हम।।
1. जग से मिली है हार करारी।
तभी तेरे दर पे है झोली पसारी।
दुखड़ा ये दिल का सुनायेंगे हम।।
2. कर्मों के मारे तुझको पुकारें।
जीये जा रहे हैं तेरे सहारे।
आखिर तो मन्ज़िल को पायेंगे हम।।
3, तुम न सुनोगे कौन सुनेगा।
पथ के ये काँटे कौन चुनेगा।
भटके हुए कहाँ जायेंगे हम।।
4. दासनदास की ये ही पुकार।
सदा मेरे दिल में हो तेरा ही प्यार।
दर्शन तेरा पायेंगे हम।।
टेक-तेरे दर पे झोली फैलायेंगे हम।
रूठे हो तुम जो मनायेंगे हम।।
1. जग से मिली है हार करारी।
तभी तेरे दर पे है झोली पसारी।
दुखड़ा ये दिल का सुनायेंगे हम।।
2. कर्मों के मारे तुझको पुकारें।
जीये जा रहे हैं तेरे सहारे।
आखिर तो मन्ज़िल को पायेंगे हम।।
3, तुम न सुनोगे कौन सुनेगा।
पथ के ये काँटे कौन चुनेगा।
भटके हुए कहाँ जायेंगे हम।।
4. दासनदास की ये ही पुकार।
सदा मेरे दिल में हो तेरा ही प्यार।
दर्शन तेरा पायेंगे हम।।
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