Tuesday, March 15, 2016

दयालु मिले न तेरे नाल दा।

तर्ज़--मेरा साजन उस पार है...।
टेक--दयालु मिले न तेरे नाल दा।
        तेरे नाल दा-----2.

1.   तेरे रंग न्यारे दाता भेद ना जाने कोई।
        सन्त रूप विच प्रगट होये दुनियाँ धन धन होई।
           सुनो जी बख्शनहारे मैं आया तेरे द्वारे।।

2.   चुम चुम रखाँ मूरत तेरी नाल मत्थे दे लावां।
        तेरे इस सुन्दर मुखड़े नूँ फूल्लां नाल सजावां।
           तेरी मैं आरती गावां सुबह और शाम मनावां।।

3.   दिल मेरे दी बस्ती अन्दर तेरा रैन बसेरा।
        ऐ दुःखभञ्जन मैंनूं सहारा तेरा।।
           पुजारी बन के आया मैं रज रज दर्शन पाया।।

4.   मनमानियां मैं बहुत कीतियाँ तेरा नाम भुला के।
        चौरासी विच फँसिया बन्दा काम क्रोध विच आके।
           अजब है तेरी माया दास नूँ पार लगाया।।

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