तर्ज़-ऐ मेरे दिले नादां----।
टेक-क्यों दिल को फँसाए तू यह देश है बेगाना।
सपने की सब रचना है धोखा न कहीं खाना।।
1. नश्वर हैं ऐ प्राणी सारे सामान यहाँ।
आया है फकत तू तो बन के मेहमान यहाँ।
बेशक प्रयोग में ला पर दिल नहीं अटकाना।।
2. जो रिश्ते बनाये हैं तुझे अन्त रुलायेंगे।
पड़े संकट जब भी कभी ये नज़रें चुराएंगे।
गुरु नाम ने ही आखिर है काम तेरे आना।।
3. यहां काल और माया ने कैसा खेल रचाया है।
गुरु कृपा बना दासा कोई छूट न पाया है।
माया जाल कटाने को सन्तों की शरण आना।।
टेक-क्यों दिल को फँसाए तू यह देश है बेगाना।
सपने की सब रचना है धोखा न कहीं खाना।।
1. नश्वर हैं ऐ प्राणी सारे सामान यहाँ।
आया है फकत तू तो बन के मेहमान यहाँ।
बेशक प्रयोग में ला पर दिल नहीं अटकाना।।
2. जो रिश्ते बनाये हैं तुझे अन्त रुलायेंगे।
पड़े संकट जब भी कभी ये नज़रें चुराएंगे।
गुरु नाम ने ही आखिर है काम तेरे आना।।
3. यहां काल और माया ने कैसा खेल रचाया है।
गुरु कृपा बना दासा कोई छूट न पाया है।
माया जाल कटाने को सन्तों की शरण आना।।
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