तर्ज़--प्यासे पंछी नील गगन--------।
टेक--नाचें गायें खुशियाँ मनायें शुभ सन्देश है आया।
सद बलिहारी उस पे जायें पैगाम खुशी का जो लाया।।
1.बड़ी मुद्दत से आस लगी थी श्री दर्शन पाने की।
मिलकर देवो सभी मुबारिक प्रीतम के आने की।
ज्यों ही खबर पड़ी कानों में मेरा रोम रोम हर्षाया।।
2.महक उठा है दिल का उपवन सुन प्रीतम का आना।
कल आयेंगे सतगुरु मेरे गाओ खुशी का तराना।
मिला मुझे अपार है सुख वो ज़ुबाँ से न जाये बताया।।
3.सूनी सूनी गलियों में फिर से छायेंगी बहारें।
जीवन में नव प्राण आयेंगे मिलेंगे प्राण प्यारे।
मिट जायेगी सब गम चिन्ता पाकर निर्भय छाया।।
4.कल आयेंगे सतगुरु मेरे हम पर उपकार कमाने।
देकर प्यारा प्यारा दर्शन अपना दास बनाने।
देखे नहीं अवगुण हमारे याद हमें फरमाया।।
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