तर्ज़-स्वर्ग से सुन्दर-----।
शेयर-काहे जायें मथुरा काहे जायें काशी काहे जायें हरिद्वार।
त्रैलोकी में सबसे ऊँचा श्री आनन्दपुर दरबार।
टेक- सबसे सुन्दर सबसे न्यारा है तेरा दरबार।
बना रहे यूँ हम पे प्रीतम सदा तुम्हारा प्यार।
तेरा दरबार न छूटे प्यार की तार न टूटे।।
1. तुझसे नेह लगा के पाये हमने सुख सारे।
पिछले कई जन्मों के जागे हैं भाग्य हमारे।
कहाँ मिलेगा ऐसा सच्चा बिन स्वार्थ व्यवहार।।
2. दीन दयालु तुम हो रहमत तेरी क्या कहना।
तुमने सिखाया जीना सत की राहों पे चलना।
बिना तुम्हारे सपने में भी जीना है बेकार।।
3. तेरे श्री चरणों में बहती है प्रेम की धारा।
इनमें है सब तीर्थ ये तीर्थ राज हमारा।
यहां झुका के सर को हमने पाया भक्ति भण्डार।।
4. ""प्रेमी''हैं हम तेरे तन मन धन तुझ पर वारें।
तुम ही संग सहाई तुम ही भगवान हमारे।
जन्म जन्म में मिले हमेशा ये पावन दरबार।।
शेयर-काहे जायें मथुरा काहे जायें काशी काहे जायें हरिद्वार।
त्रैलोकी में सबसे ऊँचा श्री आनन्दपुर दरबार।
टेक- सबसे सुन्दर सबसे न्यारा है तेरा दरबार।
बना रहे यूँ हम पे प्रीतम सदा तुम्हारा प्यार।
तेरा दरबार न छूटे प्यार की तार न टूटे।।
1. तुझसे नेह लगा के पाये हमने सुख सारे।
पिछले कई जन्मों के जागे हैं भाग्य हमारे।
कहाँ मिलेगा ऐसा सच्चा बिन स्वार्थ व्यवहार।।
2. दीन दयालु तुम हो रहमत तेरी क्या कहना।
तुमने सिखाया जीना सत की राहों पे चलना।
बिना तुम्हारे सपने में भी जीना है बेकार।।
3. तेरे श्री चरणों में बहती है प्रेम की धारा।
इनमें है सब तीर्थ ये तीर्थ राज हमारा।
यहां झुका के सर को हमने पाया भक्ति भण्डार।।
4. ""प्रेमी''हैं हम तेरे तन मन धन तुझ पर वारें।
तुम ही संग सहाई तुम ही भगवान हमारे।
जन्म जन्म में मिले हमेशा ये पावन दरबार।।
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