Monday, February 29, 2016

प्यार पा गया हूँ...

तर्ज़--याद आ रही है----।
टेक--प्यार पा गया हूँ तेरा प्यार पा गया हूँ।
     छोड़ के जग के रिश्ते नाते दरबार आ गया हूँ।।

1.यह दुनियाँ की राहें काटों ही काँटों से भरी।
    तेरे साथ मिला तो फूलों की गलियां बन गई।
      मन्ज़िल अपनी की मैं तो मीनार पा गया हूँ।।

2.माया वाले बन्धन मेरे आप ही आप टूट गये।
    तेरा नाम लिया तो सब दोष ही मेरे छूट गये।
      दुनियाँ के रंज़ो गम से मैं निज़ात पा गया हूँ।।

3.तेरे मिलन में ऐसी तासीर है सतगुरु भरी।
    की जन्मों की बिगड़ी तकदीर भी है बन गई।
      ""प्रेमी'' हूँ तेरे प्रेम का भण्डार पा गया हूँ।।

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