Tuesday, February 16, 2016

सतगुरु तेरे सुमिरण में

टेकः-सतगुरु तेरे सिमरन में मस्ती का खज़ाना है।
     पर मिलता है उसको जो बनता दीवाना है।।

1.   जब ध्यान करूँ तेरा कुछ होश नहीं रहता।
        तेरे प्रेमी झूमते हैं रंग भक्ति का चढ़ जाता।।
            ये मस्ती उसी को मिलती जो तेरा दीवाना है।।
2.   न सुध तन की रहती न मन की सुध रहती।
        इक तेरे सिमरन की मीठी सी लगन रहती।
            तेरा सिमरण वो करता जो तेरा मस्ताना है।।
3.   प्रभु देख छवि तेरी, मन गद्गद् होता है।
        तेरे वचनों में ऐसा लगे ज्यों अमृत बरसता है।।
            तेरा प्यार उसे मिलता जो बना परवाना है।।
4.   मैं दासनदास तेरा हूँ तू है सिरताज मेरा।।
        हर जन्म में सेवा करुँ मिलता रहे प्यार तेरा।।
            तेरे दर्शन सेवा से मैने नाता निभाना है।।

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