टेकः-तेरी जय होवे सतगुरु देव हमारे।
छोड़ अर्श को आये फर्श पे जग के तारनहारे।।
1. परउपकारी नाम आपका पर उपकार कमाते।
अपने भक्तों की खातिर प्रभु कई कई रूप बनाते।।
देकर अपना प्यार अनोखा दुखियों के दुःख हरते।।
2. तेरे नाम और भक्ति में है ऐसा सुख समाया।
जो भी इसको अपनाए उसने आनन्द पाया।।
है ये बात हकीकत समझो कहते देवता सारे।।
3. इस दरबार की रचना करके बहुत रहम कमाया।
सार जो सब ग्रन्थों का आपने खोल बताया।।
जीवों का तो कहना ही क्या यहाँ पत्थर भी तर जाते।।
4. सतपुरुषों के उपकारों को क्या-क्या कह सुनायें।
शेष महेश भी गा-गा हारे तो भी पार न पायें।।
आओ प्रेमी प्यारे मिलकर सुन्दर दर्शन पायें।।
5. कहीं सरोवर कहीं श्री मन्दिर शांति भवन बनाये।
समय-समय पर पहुँचकर श्री वचन फरमाये।।
परमहँसों की चरण छाया में आकर जन्म सँवारे।।
छोड़ अर्श को आये फर्श पे जग के तारनहारे।।
1. परउपकारी नाम आपका पर उपकार कमाते।
अपने भक्तों की खातिर प्रभु कई कई रूप बनाते।।
देकर अपना प्यार अनोखा दुखियों के दुःख हरते।।
2. तेरे नाम और भक्ति में है ऐसा सुख समाया।
जो भी इसको अपनाए उसने आनन्द पाया।।
है ये बात हकीकत समझो कहते देवता सारे।।
3. इस दरबार की रचना करके बहुत रहम कमाया।
सार जो सब ग्रन्थों का आपने खोल बताया।।
जीवों का तो कहना ही क्या यहाँ पत्थर भी तर जाते।।
4. सतपुरुषों के उपकारों को क्या-क्या कह सुनायें।
शेष महेश भी गा-गा हारे तो भी पार न पायें।।
आओ प्रेमी प्यारे मिलकर सुन्दर दर्शन पायें।।
5. कहीं सरोवर कहीं श्री मन्दिर शांति भवन बनाये।
समय-समय पर पहुँचकर श्री वचन फरमाये।।
परमहँसों की चरण छाया में आकर जन्म सँवारे।।
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