तर्ज़-नयनों वाली ने हाय मेरा----।
टेक-सतगुरु दर्शन को दुनियाँ सारी आई।।
1.आज की रात नसीबों वाली महफिल है मस्तानी।
सामने बैठे सतगुरु प्यारे पाई खुशी रूहानी।
जन्म शताब्दी है सतगुरु की घड़ी है कितनी सुहानी।।
2.आज इस जग के हर कोने में बजती है शहनाई।
तीनों लोकों में गूँज रही है बधाई होवे बधाई।
मिटा अँधेरा हुई रोशनी प्रगटे गुरु सुखदाई।।
3.आज तो ब्राहृा विष्णु भी छुप छुप गुरु जी के दर्शन पाते।
शिव शंकर डमरू को बजा कर सुन्दर नृत्य दिखाते।
तैंतीस करोड़ी देवता सारे मिल जयकार बुलाते।।
4.बसन्त पँचमी की बहार ये मन को मोहित करती।
श्री आनन्दपुर इतना सजा है नज़रें नहीं ठहरती।
सचही कहूँ मैं यहाँ की शोभा बैकुण्ठ को मात करती।।
टेक-सतगुरु दर्शन को दुनियाँ सारी आई।।
1.आज की रात नसीबों वाली महफिल है मस्तानी।
सामने बैठे सतगुरु प्यारे पाई खुशी रूहानी।
जन्म शताब्दी है सतगुरु की घड़ी है कितनी सुहानी।।
2.आज इस जग के हर कोने में बजती है शहनाई।
तीनों लोकों में गूँज रही है बधाई होवे बधाई।
मिटा अँधेरा हुई रोशनी प्रगटे गुरु सुखदाई।।
3.आज तो ब्राहृा विष्णु भी छुप छुप गुरु जी के दर्शन पाते।
शिव शंकर डमरू को बजा कर सुन्दर नृत्य दिखाते।
तैंतीस करोड़ी देवता सारे मिल जयकार बुलाते।।
4.बसन्त पँचमी की बहार ये मन को मोहित करती।
श्री आनन्दपुर इतना सजा है नज़रें नहीं ठहरती।
सचही कहूँ मैं यहाँ की शोभा बैकुण्ठ को मात करती।।
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