Saturday, February 20, 2016

आना ही पैणा हाराँ वालिया....

तर्ज़ः-पँख होते तो उड़ आती रे-----
 टेकः आना ह‏ी पैणा  ह‏ाराँ वालिया दिल दी आवाज़ सुन के।
       क्यों अजे तक मैनूं है टालिया।
1.   जदों दा साँवरे तैनू मैं तकिया, साँभ के दिल मैं तेरे लई रखिय़ा।
     नजर पई जद तेरी मेरे ते, आके दिल विच तू ह‏ी है वसिया।।
         दिल दी आवाज़ सुन के, क्यों अज़े तक मैनू है‏ टालिया।।

2. सोह‏ने मेरे दी सोहनी आदावाँ, वेख लवां ताँ ठर ठर जावाँ।
   सोह‏ने मुखड़े दा दीदार चाह‏वाँ, तार्इंयों मुड़ मुड़ झातियाँ पावाँ।।
         दिल दी आवाज़ सुन के, क्यों अज़े तक मैनू है‏ टालिया।।

3. रुप सोह‏णा दिल मेरा खोह‏वे, वख तैथों मैंनूं ह‏ोण न ह‏ोवे।।
 दिल करदा तैनू दिल विच वसावाँ, सोह‏णें साँवरे नूं अपना बनावाँ।।
         दिल दी आवाज़ सुन के, क्यों अज़े तक मैनू है‏ टालिया।।

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