टेक-दर्शन तेरा करके गुरु मन आनन्द छाया है।
चरणों में तेरे आके सुख शाश्वत पाया है।।
1.सोचता था पहले तुझे कैसे मैं पाऊंगा।
मन के सिंहासन में तुझे कैसे बिठलाऊँगा।
अब कृपा हुई तेरी दरबार मैं आ पहुँचा।
तुझ से थी प्रीत मेरी सरकार मैं आ पहुँचा।
दिल के हर कोने में गुरु तू ही तो समाया है।
2.इससे पहले ज़िन्दगी में गम ही गम देखे।
दे रहे थे हमको धोखा लगते जो अपने।
पर जब से आप मिले सब दूर हुए दुखड़े।
भ्रम बादल भी है छँटे हम चैन भी पाने लगे।
कष्ट हरन दुःखभञ्जन तेरा नाम ध्याया है।।
3.""प्रेमी'' तेरा हूँ तुझी से प्रेम करता हूँ।
मैं अहम सब त्याग मस्तक चरणों में धरता हूँ।
जो भूल हुई मुझसे सब माफ कर देना।
भक्ति सेवा अपनी का सतगुरु वर देना।
तुझसा कामिल सतगुरु पा धनभाग्य मनाया है।
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