टेकः-जहाँ सतगुरु आते हैं सारियाँ खुशियाँ आती हैं।
लै लै के चरण धूली गुरुमुख मुस्काते हैं।।
1. सतगुरु के आने से शुभ मंगल होता है।
गंगा कि तरह पावन मन निर्मल होता है।
वे अपने भगतों को सब कुछ दे जाते हैं।।
2. तन मन धन के सारे दुःख दूर करें दाता।
विनय अपने भगतों की मन्ज़ूर करे दाता।
जब प्रेमी बुलातें हैं प्रभु दौड़े आते हैं।।
3. मेरा सूना यह मन खुशियों से महक उठा।
सतगुरु ने दर्श दिया मन मेरा झूम उठा।
दर्शन पाकर तेरा फूले न समाते हैं।।
लै लै के चरण धूली गुरुमुख मुस्काते हैं।।
1. सतगुरु के आने से शुभ मंगल होता है।
गंगा कि तरह पावन मन निर्मल होता है।
वे अपने भगतों को सब कुछ दे जाते हैं।।
2. तन मन धन के सारे दुःख दूर करें दाता।
विनय अपने भगतों की मन्ज़ूर करे दाता।
जब प्रेमी बुलातें हैं प्रभु दौड़े आते हैं।।
3. मेरा सूना यह मन खुशियों से महक उठा।
सतगुरु ने दर्श दिया मन मेरा झूम उठा।
दर्शन पाकर तेरा फूले न समाते हैं।।
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