टेक-खुद खुदा को घर बुलाये कौन है वो प्रेम है।
1. प्रेम है प्रह्लाद का और ध्रुव का भी प्रेम है।
बादशाही को छुड़ावे कौन है वो प्रेम है।।
2. प्रेम के वश हो पत्थर फाड़ कर आना पड़ा।
गोएं जंगल में चराये कौन है वो प्रेम है।।
3. प्रेम से छिलके खिलाये बेनमक के साग भी।
झूठे बेरों को खिलाये कौन है वो प्रेम है।।
4. प्रेम से सूली चढ़े वो जिन्हें तेरा प्रेम था।
खाल गर्दन की खिंचाए कौन है वो प्रेम है।।
5. प्रेम के दरबार में यह दास भी चाहता है प्रेम।
आस जो दिल की बुझाय कौन है वो प्रेम है।।
1. प्रेम है प्रह्लाद का और ध्रुव का भी प्रेम है।
बादशाही को छुड़ावे कौन है वो प्रेम है।।
2. प्रेम के वश हो पत्थर फाड़ कर आना पड़ा।
गोएं जंगल में चराये कौन है वो प्रेम है।।
3. प्रेम से छिलके खिलाये बेनमक के साग भी।
झूठे बेरों को खिलाये कौन है वो प्रेम है।।
4. प्रेम से सूली चढ़े वो जिन्हें तेरा प्रेम था।
खाल गर्दन की खिंचाए कौन है वो प्रेम है।।
5. प्रेम के दरबार में यह दास भी चाहता है प्रेम।
आस जो दिल की बुझाय कौन है वो प्रेम है।।
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