टेकः-गुरु चरणों में जिसका सम्बन्ध है,
उसको हरदम आनन्द ही आनन्द है।।
जो उसकी रज़ा में रज़ामन्द है,
जो उसकी रज़ा में रज़ामन्द है,
उसको हरदम आनन्द ही आनन्द है।।
1. निन्दा चुगली न उसको सुहावे।
झूठी संगत ना मन को भावे।।
उसको सतसंग ही करना पसन्द है।। उसको हरदम----।।
2. जो दुनियाँ से ना शरमावे।
गुरु चरणों में ध्यान लगावे।।
जिसके नैनी घमण्ड ना पखण्ड है।। उसको हरदम----।।
3. झूठी दुनियां का छोड़ो सहारा।
लै लो पूरे गुरां दा सहारा।।
प्रेम भक्ति ही उसकी सौगन्ध है।। उसको हरदम----।।
1. निन्दा चुगली न उसको सुहावे।
झूठी संगत ना मन को भावे।।
उसको सतसंग ही करना पसन्द है।। उसको हरदम----।।
2. जो दुनियाँ से ना शरमावे।
गुरु चरणों में ध्यान लगावे।।
जिसके नैनी घमण्ड ना पखण्ड है।। उसको हरदम----।।
3. झूठी दुनियां का छोड़ो सहारा।
लै लो पूरे गुरां दा सहारा।।
प्रेम भक्ति ही उसकी सौगन्ध है।। उसको हरदम----।।
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