तर्ज़-रमैय्या वस्ता वैय्या----.
टेक-मेरा दिलदार है तू मेरा गमख्वार है तू।
तुझ पे बलिहार जाऊँ, तुझपे बलिहार जाऊँ।।
1.तुझसे प्यार करुँ दिल निसार करूँ,तेरी उल्फत का मैं मस्ताना बनूँ।
तेरे बिन और कहीं दिल को ठौर नहीं,तेरे चरणों का मैं दीवाना बनूँ।
जग से तोड़ के अब, तुझ संग जोड़ के अब।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
2.अन्तर्यामी हो तुम मेरेस्वामी हो तुम तेरीरहमत का प्रभु पारावार नहीं।
मैं इबादत करूँ तेरी खिदमत करुँ कुछ भी और मुझे दरकार नहीं।
आया हूँ तेरी शरण, काट दो जन्म मरण।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
3.मेरा राहबर है तू और मुकद्दर है तू आस झूठे जगत की छोड़ी मैंने।
जबसे तूहै मिला कमल दिलका खिला प्रीतकेवल तुम्हींसे हैजोड़ीमैने।
मेरे सिरताज प्रभो, रखना लाज प्रभो।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
4.तेरे आगे दातार दास करता पुकारअपने चरणों का बख्शो प्यार मुझे।
ध्याऊं नाम तेरा यही हो काम मेरा कोई जग से न हो सरोकार मुझे।
तू ही है नाथ मेरा, रहे संग साथ तेरा।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
टेक-मेरा दिलदार है तू मेरा गमख्वार है तू।
तुझ पे बलिहार जाऊँ, तुझपे बलिहार जाऊँ।।
1.तुझसे प्यार करुँ दिल निसार करूँ,तेरी उल्फत का मैं मस्ताना बनूँ।
तेरे बिन और कहीं दिल को ठौर नहीं,तेरे चरणों का मैं दीवाना बनूँ।
जग से तोड़ के अब, तुझ संग जोड़ के अब।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
2.अन्तर्यामी हो तुम मेरेस्वामी हो तुम तेरीरहमत का प्रभु पारावार नहीं।
मैं इबादत करूँ तेरी खिदमत करुँ कुछ भी और मुझे दरकार नहीं।
आया हूँ तेरी शरण, काट दो जन्म मरण।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
3.मेरा राहबर है तू और मुकद्दर है तू आस झूठे जगत की छोड़ी मैंने।
जबसे तूहै मिला कमल दिलका खिला प्रीतकेवल तुम्हींसे हैजोड़ीमैने।
मेरे सिरताज प्रभो, रखना लाज प्रभो।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
4.तेरे आगे दातार दास करता पुकारअपने चरणों का बख्शो प्यार मुझे।
ध्याऊं नाम तेरा यही हो काम मेरा कोई जग से न हो सरोकार मुझे।
तू ही है नाथ मेरा, रहे संग साथ तेरा।
तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
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