टेक--प्रगटी है जग में ज्योति इलाही।
हर और खुशियाँ खुशियां हैं छार्इं।
शरद ऋतु ने ली है विदाई। ऋतु बसन्त सुहानी है आई।।
1. आज के दिन प्रगटे द्वितीय महाराज।
सबको मुबारक होवे मुबारक बाद।
इनकी महिमा चौकुण्ठी में छाई।।
2. पाप अधर्म ने डेरा उठाया।
नाम भक्ति का डंका बजाया।
चरणों में झुक गई सारी खुदाई।।
3. परहित कारण लाखों कष्ट उठाये।
करुणा के सागर प्रभु करुणा कर आये।
रुहानी दौलत भर भर लुटाई।।
4. हर युग युग में रुप बदल कर।
आये धरा पर भक्तों की खातिर।
जन्मों की बिछुड़ी रुहें संग मिलार्इं।।
5. इनके चरणों पे दास जाये बलिहार।
बख्शा हमें अपना सच्चा आधार।
लोक परलोक में संग सहाई।।
तर्ज़--तू प्यार करे या ठुकराये------।
हर और खुशियाँ खुशियां हैं छार्इं।
शरद ऋतु ने ली है विदाई। ऋतु बसन्त सुहानी है आई।।
1. आज के दिन प्रगटे द्वितीय महाराज।
सबको मुबारक होवे मुबारक बाद।
इनकी महिमा चौकुण्ठी में छाई।।
2. पाप अधर्म ने डेरा उठाया।
नाम भक्ति का डंका बजाया।
चरणों में झुक गई सारी खुदाई।।
3. परहित कारण लाखों कष्ट उठाये।
करुणा के सागर प्रभु करुणा कर आये।
रुहानी दौलत भर भर लुटाई।।
4. हर युग युग में रुप बदल कर।
आये धरा पर भक्तों की खातिर।
जन्मों की बिछुड़ी रुहें संग मिलार्इं।।
5. इनके चरणों पे दास जाये बलिहार।
बख्शा हमें अपना सच्चा आधार।
लोक परलोक में संग सहाई।।
तर्ज़--तू प्यार करे या ठुकराये------।
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