तर्ज़--इक प्यार का नगमा है----।
टेक--आपका दीदार पाया, दिल को चैन करार आया।
मिट गये सारे दुःख और गम, खुशियों का भण्डार पाया।।
1. इन नयनों में भर लूँ प्रभु तेरा सुन्दर जलवा हसीन।
कब से तड़प रहा था ये दिल जैसे जल बिन तपड़ती मीन।
श्री दर्शन का अमृत रस पीके मन आज तृप्ताया।।
2. रोम रोम हुआ पुलकित देखकर मनहर झाँकी।
कोटि कोटि मुबारिक हो सबको सुन्दर सुहानी घड़ी।
सदके वारी जाऊँ चरणौं पर रहमत मेंह बरसाया।।
3. नव उल्लास छाया है हर गली और कण कण में।
पाई सबने अनूठी खुशी अपने प्रीतम के मिलने से।
हो गया धन धन जीवन पाकर निर्भय छाया।।
4. आया मौसम बहारों का प्यारे सुन्दर नज़ारों का।
हर शै हर दिल पर जी इक रंग नया छा गया।
शोभा वर्णन कर न सकूँ सोया भाग्य जगाया।।
5. सदा सुन्दर दर्शन पाऊँ बस इतना ही मैं चाहूँ।
करूँ निशदिन तेरी सेवा और महिमा तेरी गाऊँ।
दास के ह्मदय में बसो माँगूँ सच्चा ये सरमाया।।
टेक--आपका दीदार पाया, दिल को चैन करार आया।
मिट गये सारे दुःख और गम, खुशियों का भण्डार पाया।।
1. इन नयनों में भर लूँ प्रभु तेरा सुन्दर जलवा हसीन।
कब से तड़प रहा था ये दिल जैसे जल बिन तपड़ती मीन।
श्री दर्शन का अमृत रस पीके मन आज तृप्ताया।।
2. रोम रोम हुआ पुलकित देखकर मनहर झाँकी।
कोटि कोटि मुबारिक हो सबको सुन्दर सुहानी घड़ी।
सदके वारी जाऊँ चरणौं पर रहमत मेंह बरसाया।।
3. नव उल्लास छाया है हर गली और कण कण में।
पाई सबने अनूठी खुशी अपने प्रीतम के मिलने से।
हो गया धन धन जीवन पाकर निर्भय छाया।।
4. आया मौसम बहारों का प्यारे सुन्दर नज़ारों का।
हर शै हर दिल पर जी इक रंग नया छा गया।
शोभा वर्णन कर न सकूँ सोया भाग्य जगाया।।
5. सदा सुन्दर दर्शन पाऊँ बस इतना ही मैं चाहूँ।
करूँ निशदिन तेरी सेवा और महिमा तेरी गाऊँ।
दास के ह्मदय में बसो माँगूँ सच्चा ये सरमाया।।
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