तर्ज़--बाजरे दा सिट्टा----।
टेक--दिल के चमन में फिर से छा गई खुशहाली।
आ गया है घर में कुल दुनियाँ का वाली।।
1. व्याकुल दिलों की पीर मिटाई देकर सुन्दर दर्शन।
रहमत का मेंह बरसाकर कर दिया शीतल तन मन।
चरणों पे जाऊँ वारी मिटा दी दुविधा सारी।
विरह में डूबी मेरी नैया आकर के बचा ली।।
2. आज मुबारकबाद हो सबको प्रीतम घर में आये।
अपने संग साथ में है नई बहारें लाये।
गीत खुशियों के गायें धन धन भाग मनायें।
आ गई है फिर से घर में आज दीवाली।।
3. रहमत का सागर मौज़ में आकर हुआ दयाल।
रंक को इक पल के अन्दर कर दिया मालामाल।
क्या उपकार सुनाऊँ बदला कैसे चुकाऊँ।
अपनी इस बगिया की करने आये खुद रखवाली।
4. धन धन मेरे प्रीतम प्यारे धन धन आपकी महिमा।
तुझसा दयावान दुनियाँ में देखा और कहीं ना।
पर उपकार की खातिर लाखों कष्ट उठाकर।
अपनी बिछुड़ी रुहें आकर के सँभाली।।
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