तर्ज़--देख तेरे संसार------।
टेक--भक्ति प्रेम और सच्चे सुख का ये है केन्द्र महान।
सज्जनों श्री आनन्दपुर स्थान।।
1.शान है इसकी अजब निराली खूब सजा दरबार हैआली।
जो भी आवे बन के सवाली जाये न वह हरगिज़ खाली।
श्रद्धा भाव से जो भी आवे पावे सच्चा मान।।
2. श्री मन्दिर का भव्य नज़ारा लगता कैसा प्यारा प्यारा।
बहती प्रेम अमृत की धारा सुख शान्ति का चले फव्वारा।
प्रेमी जन हैं मज्जन करते गाते हैं गुण गान।।
3.भक्तों का आधार बना है मुक्ति का यह द्वार बना है।
खुशियों का आगार बना है दुखियों का गमख्वार बना है।
गम का मारा जीव जो आवे पावे सुख महान।।
4. क्यों न अपने भाग मनायें दर्शन पायें शीश झुकायें।
दासा चरणों पे बलिबलि जायें तनमन धन सब भेंट चढ़ायें।
दीन भाव से जो भी आवे पावे भक्ति दान।।
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