Sunday, July 10, 2016

श्री दर्शन भजन सुमरण ध्यान लगाऊं तुम्हारा

तर्ज़ः-   अकले हैं चले आओ
मुखड़ाः- श्री दर्शन भजन सुमरण ध्यान लगाऊं तुम्हारा
यही जीवन का मक्सद हो हमारा

1    तुम्हीं आँखों की ठंडक, जिगर का सहारा
वैकन्ठों से भी बढ़कर, तेरा दीदार प्यारा--श्री दर्शन

2    करे जीवन को उजज्वल, तुम्हीं वो रोशनी हो
जो आकर फिर न जाए, वही साची खुशी हो--

3    तुम्हें दिल में बसाकर, नैयन से नीर बहाऊॅं
ये दासन दास चाहे, प्रभू तुझ को रीझाऊं।

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