तर्ज़-मुझे पीने का शौक नहीं----.
टेक-तेरे दर पे मैं आ ही गया तेरे दर्शन को पाने को।
प्यार चरणों का पाने को ते दर्शन को पाने को।।
1.आँखों में नज़ारों ने नई रोशनी दिखलाई।
आया जब हुज़ूरी में सुख शान्ति है पाई।
और खुद को भुला डाला पाके भक्ति खज़ाने को।।
2.खुशियों से भरा यह दिल जिसका ही नहीं है हिसाब।
पाके दौलत तेरे दीदकी भरगई दिल की कोरी किताब।
प्यास जन्मों कीअब है मिटीमिली शमा परवाने को।।
3.अब आते न चरणों में हम मौजों की रवानी में।
बहुत भारी खता करते डूबते गहरे पानी में।
अब तो बाकी है यह ज़िन्दगी नाम तेरा ही ध्याने को।।
4.गुरु रखना दया की नज़र अपने चरणों में दीजे जगह।
भटके ना यह सुरति मेरी सुनो सतगुरु यही इल्तेजा।
गिरता हूँ उठा लेना इस ""प्रेमी'' दीवाने को।।
टेक-तेरे दर पे मैं आ ही गया तेरे दर्शन को पाने को।
प्यार चरणों का पाने को ते दर्शन को पाने को।।
1.आँखों में नज़ारों ने नई रोशनी दिखलाई।
आया जब हुज़ूरी में सुख शान्ति है पाई।
और खुद को भुला डाला पाके भक्ति खज़ाने को।।
2.खुशियों से भरा यह दिल जिसका ही नहीं है हिसाब।
पाके दौलत तेरे दीदकी भरगई दिल की कोरी किताब।
प्यास जन्मों कीअब है मिटीमिली शमा परवाने को।।
3.अब आते न चरणों में हम मौजों की रवानी में।
बहुत भारी खता करते डूबते गहरे पानी में।
अब तो बाकी है यह ज़िन्दगी नाम तेरा ही ध्याने को।।
4.गुरु रखना दया की नज़र अपने चरणों में दीजे जगह।
भटके ना यह सुरति मेरी सुनो सतगुरु यही इल्तेजा।
गिरता हूँ उठा लेना इस ""प्रेमी'' दीवाने को।।
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