Tuesday, July 5, 2016

मुखड़ाः- मेरे साहिबा मुझे अपनी, शरण में सदा रखना



मैं लज पाला....
मुखड़ाः- मेरे साहिबा मुझे अपनी, शरण में सदा रखना
मेरे सिर पर सदा अपनी, प्यार की एक नज़र रखना
मेरे जीवन की नइया को प्रभू जी पार तू करना--मेरे साहिबा

1    
तू सुनता है पुकारों को, जो ह्नदय से निकलती हैं
अर्जियां लेकर मैं आया हूँ, मेरे मालिक दया करना

2    
यूं तो हर कोई लेता है, सहारे अपने लोगों के(दुनिया वालों के)
मेरा तो एक सहारा तू, मुझे अपनी शरन रखना

3    
जहां देखूं वहां तुम हो, मुझे ऐसी नज़र दे दो
मेरे मन में मेरे दिल में, सदा तुम ही बने रहना,

4    
दास मुझको है डर किसका, मेरा है पीर लासानी
मेरे मुर्षीद मेरे मालिक, मेरे सिर हाथ तुम रखना
सदा ही पास तुम रखना, सदा तुम साथ में रहना

No comments:

Post a Comment