मुखड़ाः- लब पे रहेगा तेरा नाम ओ सतगुरु, आख्रिी दम तक
आख्रिी दम तक-2 अगले जन्म तक,
अगल जन्म नहीं जन्म जन्म तक
1आपने मुझको काग से हसं बना डाला
एसा पिलाया, अमृत रस का वो प्याला
पड़ता रहेगा तुम से काम, ओसतगुरु
2 आपने ही तो प्रेमी मुझे बनाया है
जग में कैसे रहूंॅ ये भी तो सिखाया है
नहीं भुलूंगी अहिसान, ओ सतगुरु
3तेरे प्यार ने मेरी होंष गवांई है
भटिकी सुरती चरणों संग लगाई है
यादि आयेगी सुबह षाम, ओ सतगुरु
आख्रिी दम तक-2 अगले जन्म तक,
अगल जन्म नहीं जन्म जन्म तक
1आपने मुझको काग से हसं बना डाला
एसा पिलाया, अमृत रस का वो प्याला
पड़ता रहेगा तुम से काम, ओसतगुरु
2 आपने ही तो प्रेमी मुझे बनाया है
जग में कैसे रहूंॅ ये भी तो सिखाया है
नहीं भुलूंगी अहिसान, ओ सतगुरु
3तेरे प्यार ने मेरी होंष गवांई है
भटिकी सुरती चरणों संग लगाई है
यादि आयेगी सुबह षाम, ओ सतगुरु
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