तर्ज़--चल उड़ जा रे पँछी----।
टेक--कुछ सोच समझ इन्सां क्यों तू इस दुनियां में आया।
1. बालापन तूने खेल गँवाया मौज़ में बीती जवानी।
वृद्ध हुआ तन थर थर कांपे कौन करे निगरानी।
हाय हाय अन्त में तेरी बीत गई जिन्दगानी।
फिर भी तू सोया गफलत में और सँभल न पाया।।
2. रिश्ते झूठे नाते झूठे झूठे से तू प्यार करे।
मतलब के वो संगी साथी जिनका तू एतबार करे।
साथ न देंगे तेरा जिनकी चिन्ता बारम्बार करे।
अन्त समय में किसने किसका जग में साथ निभाया।।
3. दिन दिन घटती आयु तेरी तू कहता मैं जवान हुआ।
काल खड़ा है सर पे तेरे ऐसा क्यों नादान हुआ।
जो है बचाता काल भँवर से उससे क्यों अन्जान हुआ।
कैसे होगी मुक्ति तेरी अब तक न गुण गाया।।
4. जब मिल जाये सतगुरु पूरा हर मुश्किल आसान करे।
जन्म जन्म के तोड़ के बन्धन प्रगट में भगवान करे।
सूने जगत जीवन पे तेरे सतगुरु ही एहसान करे।
समझ गया है वो ही बन्दा गुरु शरण जो आया।।
टेक--कुछ सोच समझ इन्सां क्यों तू इस दुनियां में आया।
1. बालापन तूने खेल गँवाया मौज़ में बीती जवानी।
वृद्ध हुआ तन थर थर कांपे कौन करे निगरानी।
हाय हाय अन्त में तेरी बीत गई जिन्दगानी।
फिर भी तू सोया गफलत में और सँभल न पाया।।
2. रिश्ते झूठे नाते झूठे झूठे से तू प्यार करे।
मतलब के वो संगी साथी जिनका तू एतबार करे।
साथ न देंगे तेरा जिनकी चिन्ता बारम्बार करे।
अन्त समय में किसने किसका जग में साथ निभाया।।
3. दिन दिन घटती आयु तेरी तू कहता मैं जवान हुआ।
काल खड़ा है सर पे तेरे ऐसा क्यों नादान हुआ।
जो है बचाता काल भँवर से उससे क्यों अन्जान हुआ।
कैसे होगी मुक्ति तेरी अब तक न गुण गाया।।
4. जब मिल जाये सतगुरु पूरा हर मुश्किल आसान करे।
जन्म जन्म के तोड़ के बन्धन प्रगट में भगवान करे।
सूने जगत जीवन पे तेरे सतगुरु ही एहसान करे।
समझ गया है वो ही बन्दा गुरु शरण जो आया।।
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