Friday, July 15, 2016

टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।

तर्ज़--मिलती है ज़िन्दगी मे----।
        टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।
                कदमों में उनके अपना सब कुछ लुटा के देख।।
        1.        तेरी सूनी ज़िन्दगी में आ जायेगी बहार।
                तस्वीर सतगुरु की दिल में बसा के देख।।
        2.        सतगुरु की मौज में ही रहने में है भला।
                जिन्दगी को उनकी मौज मुताबिक बना के देख।।
        3.        तेरे रास्ते की सारी टल जायेंगी बला।
                राहे मारफत में उनको राहबर बना के देख।
        4.        तेरे दिल की दुनियाँ होगी नूरे मारफत से रोशन।
                दुई का पर्दा अपने दिल से उठा के देख।।
        5.        दुनियाँ के रंज़ो गम से तू पायेगा निज़ात।
                तसव्वर में सतगुरु के खुद को भुला के देख।।
        6.        सोहबत में आरिफों की मिलता है सुख हकीकी।
                महफिल में उनकी बन्दे इक बार आ के देख।।
        7.        हमदर्द जीव के हैं फक्त सतगुरु जहान में।
                कदमों में उनके अपने दिल को लगा के देख।।
        8.        सतगुरु हैं मेहरबां ते सब जग है मेहरबाँ।
                तू उनको दास अपना मेहरबाँ बना के देख।।

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