Monday, September 12, 2016

हर पासे अज रौनकाँ बहारां,

तर्ज़-पहलां सतगुरु नूं अपना----।
टेक-हर पासे अज रौनकाँ बहारां,निराला कोई पीरआ गया।
    इस घड़ी उत्तों की कुझ वारां,मैं सोहणा दीदार पा लिया।।
                            कि धरती ते रब आ गया।।
1.धुरधाम तों उतरी ऐ शक्ति,चौकुण्ठी विच महिमा फैली।
     इसदे रूप दा वेख लिशकारा, जग ते निहाल हो गया।।

2.रामकृष्ण कदी नानक बनदे,हरयुग विचआंदे रूप बदल के।
  हुण रूप निराला ऐ धारा, कि भक्तां दे दिल नूं भा गया।।

3.प्रेमी जनां नूं छाई मस्ती, वेख के प्यारी सोहणी झाँकी।
    दीवाना बनाया जग सारा, निराला कोई पीर आ गया।।

4.ब्राहृा विष्णु स्तुति गाँदे, ऋषि मुनि सारे ध्यान लगांदे।
   मंगदे चरणां दा ओह वी सहारा,तेरे नाल दिल ला लिया।।

5        युगयुगराजकरोरहोसलामत,रोशन जहां मेरा तेरे नाल मालिक
          रहे सिर ते अटल तेरा साया, तेरे नाल प्यार पा लिया।।
6.    सब नूं मुबारिक कोटि मुबारिक 20 सितम्बर मुबारक।
    अज दा दिन बड़ा करमां वाला,कि मैं ता मालामाल हो गया।।
                            कि मैं ताँ निहाल हो गया।।

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