Tuesday, June 7, 2016

मेरे सतगुरु प्यारे का जलवा ही निराला है।

टेकः-मेरे सतगुरु प्यारे का जलवा ही निराला है।
     अम्बर का सूरज है, धरती का उजाला है।।

1.   तुम सामने होते हो फिर दूरी नहीं होती।
        दीदार की हसरत क्यों फिर पूरी नहीं होती।।
            तू कैसा जादूगर सतगुरु मतवाला है।।
2.   तुम पास नहीं होते फिर गम आ जाता है।
        तेरी याद में सतगुरु जी दिल शांत हो जाता है।
            कोई क्या जाने कैसे मैने दिल को सँभाला है।।
3.   हर घड़ी मेरी बीते सतगुरु तेरे चरणों में।
        दिल ऐसा लगे मेरा प्रभु तेरे दर्शन में।
            दिन रात पिता बनकर तूने मुझको सँभाला है।।
4.   त्रैलोकी के मालिक सब के रखवाले हो।
        तुम दास के स्वामी हो जग तारनहारे हो।
            समझेगा वही गुरुमुख जो समझने वाला है।।


No comments:

Post a Comment