तर्ज़--तेरा मन दर्पण कहलाये-----।
टेक--तेरा नाम प्रभु जो ध्याये।
जन्म जन्म की मोह ममता से निश्चय छूट वह जाये।।
1. एक रत्ती भी नाम तेरे की जिस घट में बस जाये।
तम अज्ञान विनाशे सारा सुख साचा वह पाये।
घास के सूखे ढेर को जैसे ज़रा सी आग लगाये।।
2. जग सारा है खादिम उस का जिसका तू हो जाये।
छोड़ भरोसा औरों का जो तुझ से लौ लगाये।
दुनियाँ बेशक चाहे उसको पर वह तुझको चाहे।।
3. नाम की अदभुत महिमा तो सब सन्तों ने है गाई।
नाम बिना भव सागर तरना महाकठिन है भाई।
नाम से ही उज्जवल मुख होवे ठोकर कभी न खाये।
4. दासन दासा नाम बिना झूठे हैं धन्धे सारे।
नाम है तेरी अपनी पूँजी सोच समझ ले प्यारे।
लोक परलोक का संगी साथी निज घर दे पहुँचाये।।
टेक--तेरा नाम प्रभु जो ध्याये।
जन्म जन्म की मोह ममता से निश्चय छूट वह जाये।।
1. एक रत्ती भी नाम तेरे की जिस घट में बस जाये।
तम अज्ञान विनाशे सारा सुख साचा वह पाये।
घास के सूखे ढेर को जैसे ज़रा सी आग लगाये।।
2. जग सारा है खादिम उस का जिसका तू हो जाये।
छोड़ भरोसा औरों का जो तुझ से लौ लगाये।
दुनियाँ बेशक चाहे उसको पर वह तुझको चाहे।।
3. नाम की अदभुत महिमा तो सब सन्तों ने है गाई।
नाम बिना भव सागर तरना महाकठिन है भाई।
नाम से ही उज्जवल मुख होवे ठोकर कभी न खाये।
4. दासन दासा नाम बिना झूठे हैं धन्धे सारे।
नाम है तेरी अपनी पूँजी सोच समझ ले प्यारे।
लोक परलोक का संगी साथी निज घर दे पहुँचाये।।
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