तर्ज़--बच्चे मन के सच्चे------।
टेक--कर दो प्रभु अब कर दो रहमत की नज़र अब कर दो।
कब से आस लगाये बैठे खाली झोली भर दो।।
1. सृष्टि के हर कौने में तेरी दया की धूम मची।
जो भी आया शरण तेरी उस पर तूने रहमत की।
शान तेरी को सुन करके झोली फैलायी तेरे दर पे।
अपनी प्रेमा भक्ति से प्रभु जी इसको अब तो भर दो।।
2. मेरे ह्मदय मन्दिर में नाम की अनुपम ज्योति जगे।
लिव लग जाये चरणों से दिल में बस तू ही तू रहे।
ये है मेरे दिल का भाव और नहीं है कुछ भी चाव।
करुणा के सागर सतगुरु जी इतनी दया अब कर दो।।
3. निशदिन तव चरणों के संग जुड़ी रहे तार मेरे दिल की।
इक पल कभी न दूर होऊँ मन्ज़ूर करो प्रभु विनती।
तुम ही हो बस दास के मीत पाऊँ सदा तेरी निर्मल प्रीत।
ये उपकार नहीं भूलूँगा अपनी भक्ति का वर दो।।
टेक--कर दो प्रभु अब कर दो रहमत की नज़र अब कर दो।
कब से आस लगाये बैठे खाली झोली भर दो।।
1. सृष्टि के हर कौने में तेरी दया की धूम मची।
जो भी आया शरण तेरी उस पर तूने रहमत की।
शान तेरी को सुन करके झोली फैलायी तेरे दर पे।
अपनी प्रेमा भक्ति से प्रभु जी इसको अब तो भर दो।।
2. मेरे ह्मदय मन्दिर में नाम की अनुपम ज्योति जगे।
लिव लग जाये चरणों से दिल में बस तू ही तू रहे।
ये है मेरे दिल का भाव और नहीं है कुछ भी चाव।
करुणा के सागर सतगुरु जी इतनी दया अब कर दो।।
3. निशदिन तव चरणों के संग जुड़ी रहे तार मेरे दिल की।
इक पल कभी न दूर होऊँ मन्ज़ूर करो प्रभु विनती।
तुम ही हो बस दास के मीत पाऊँ सदा तेरी निर्मल प्रीत।
ये उपकार नहीं भूलूँगा अपनी भक्ति का वर दो।।
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