Thursday, January 21, 2016

अपने चरणों का देके सहारा....

तर्ज़--हँसता हुआ नुरानी------।
  टेक--अपने चरणों का देके सहारा दूर किया है दुख गम सारा।
     मोह बन्धनों से छुड़वा करके किया आज़ाद।।
 
  1.महफिल जब से तुम्हारी है पाई जन्म मरण की पीर गँवाई।
        भव में डूबे जाते थे हम आके बचाया तुमने भगवन।
                    देकर नाम जहाज।।
 
  2.सच झूठ का हमको ज्ञान कराया भूले थे हम सही मार्ग दिखाया।
        पल में हमारी हालत बदली रहमत की इक दृष्टि कर दी।
                    जागे हमारे भाग।।
 
  3.सब मुश्किलें टल गर्इं मेरे सर से जब से मैं आया प्रभु तेरे दर पे।
        रंक को कर दिया धनवान देकर प्रेम भक्ति का दान।
                     जग से किया बेमुहताज।।
 
  4.दास सदा चरणों पे बल बल जाये रैन दिवस गुणवाद तेरे गाये।
        एहसान मुझपे किया जो भारी डूबती मेरी नैया बचा ली।
                    मेरे सँवारे सब काज।।

No comments:

Post a Comment