तर्ज़--मुझे तेरी मुहब्बत का-----।
टेक--तेरी रहमत का अधिकारी बनूँ दिल की तमन्ना है।
सिवा इसके न कुछ चाहूँ फक्त इतनी सी चाहना है।।
1. न देखो जी गुनाह मेरे कि मैं हर पल हूँ भूलनहार।
देखना अपनी रहमत को कि दाता तुम हो बख्शनहार।
तेरे चरणों में सतगुरु जी मेरी बस ये ही प्रार्थना है।।
2. कर्म निशदिन करूँ ऐसे सदा जो तुझको भाते हों।
जीवन में संग हो उनका जो दिल से तुमको ध्याते हों।
रिझाऊँ तुमको ही भगवन यही दिल की भावना है।।
3. मेरे लब पे हो चर्चा बस तुम्हारे नाम की सतगुरु।
तुम्हारे ध्यान में हरदम रहे लवलीन मेरा मन।
नहीं कुछ और चाहिये मुझे केवल तेरी कामना है।।
4. जीवन की कश्ती को तेरे हवाले कर दिया मैनें।
क्यों न मैं बेफिकर होऊँ थामी पतवार जो तूने।
दास का जीवन सफल हुआ मिला जो तुझसा राहनुमा है।।
टेक--तेरी रहमत का अधिकारी बनूँ दिल की तमन्ना है।
सिवा इसके न कुछ चाहूँ फक्त इतनी सी चाहना है।।
1. न देखो जी गुनाह मेरे कि मैं हर पल हूँ भूलनहार।
देखना अपनी रहमत को कि दाता तुम हो बख्शनहार।
तेरे चरणों में सतगुरु जी मेरी बस ये ही प्रार्थना है।।
2. कर्म निशदिन करूँ ऐसे सदा जो तुझको भाते हों।
जीवन में संग हो उनका जो दिल से तुमको ध्याते हों।
रिझाऊँ तुमको ही भगवन यही दिल की भावना है।।
3. मेरे लब पे हो चर्चा बस तुम्हारे नाम की सतगुरु।
तुम्हारे ध्यान में हरदम रहे लवलीन मेरा मन।
नहीं कुछ और चाहिये मुझे केवल तेरी कामना है।।
4. जीवन की कश्ती को तेरे हवाले कर दिया मैनें।
क्यों न मैं बेफिकर होऊँ थामी पतवार जो तूने।
दास का जीवन सफल हुआ मिला जो तुझसा राहनुमा है।।
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