तर्ज़-अच्छा सिला दिया-----।
टेक-प्रभु नाम हिरदे में धारो प्रेमियों।
नाम बिन झूठे हैं पसारे प्रेमियों।।
1. नाम से संवरते हैं बिगड़े काज।
नाम ही भव तरने का जहाज़।
इक पल इसें न विसारो प्रेमियों।
जीवन ये अपना संवारों प्रेमियों।।
2. जिसनें भी घट में बसाया नाम को।
पा लिया उसने सच्चे धाम को।
मिलते हैं प्रेम के हुलारे प्रेमियों।
नाम बिन झूठे हैं सहारे प्रेमियों।।
3. नाम जो जपे हरि को पावे।
लोक परलोक संवर जावें।
रहते वो जग से न्यारे प्रेमियों।
नाम बिन झूठे हैं पसारे प्रेमियों।।
4. दासन हर पल नाम सम्भाल।
कोड़ियों के बदले खो न लाल।
सब कुछ इस पर वारो प्रेमियों।
जीवन ये अपना सँवारो प्रेमियों।।
टेक-प्रभु नाम हिरदे में धारो प्रेमियों।
नाम बिन झूठे हैं पसारे प्रेमियों।।
1. नाम से संवरते हैं बिगड़े काज।
नाम ही भव तरने का जहाज़।
इक पल इसें न विसारो प्रेमियों।
जीवन ये अपना संवारों प्रेमियों।।
2. जिसनें भी घट में बसाया नाम को।
पा लिया उसने सच्चे धाम को।
मिलते हैं प्रेम के हुलारे प्रेमियों।
नाम बिन झूठे हैं सहारे प्रेमियों।।
3. नाम जो जपे हरि को पावे।
लोक परलोक संवर जावें।
रहते वो जग से न्यारे प्रेमियों।
नाम बिन झूठे हैं पसारे प्रेमियों।।
4. दासन हर पल नाम सम्भाल।
कोड़ियों के बदले खो न लाल।
सब कुछ इस पर वारो प्रेमियों।
जीवन ये अपना सँवारो प्रेमियों।।
No comments:
Post a Comment