Wednesday, January 20, 2016

भजन- मेरे दिल में तेरी भक्ति

तर्ज़--न झटको जुल्फ से पानी--।
टेक--मेरे दिल में तेरी भक्ति को पाने की तमन्ना है।
     मेरे मुर्शिद तुझे अपना बनाने की तमन्ना है।।

1.   ये सिर तेरी अमानत है झुकेगा क्यों कहीं जाकर।
     इसे तेरे ही कदमों में झुकाने की तमन्ना है।।

2.   मुझे थी जुस्तजू जिसकी वह दाता तुम्हीं तो हो।
     तुम्ही को दिल के आसन पर बिठाने की तमन्ना है।।

3.   श्री चरणों में भक्ति प्रेम के दरिया मचलते हैं।
     श्री चरणों के सागर में नहाने की तमन्ना है।।

4.   बिछाया जो ना था अब तक किसी के सामने हरगिज़।
     वही दामन तेरे दर पर बिछाने की तमन्ना है।।

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