तर्ज़--फिरकी वाली तू------।
टेक--सतगुरु तेरी शरण में जो आये दुखड़े गँवाये।
पाये सुख सार जी, होवे दूर सकल अँधियार जी।।
1. तेरी चर्चा फैली जहाँ में जाने जमाना सारा।
मोह से आज़ाद जीवों को करना ये है काम तुम्हारा।
जन्म जन्म बिगड़ी सारी मन की व्याधा भारी।
गम चिन्ता से होवे किनारा जाये दुःख सारा।
जो आवे चरणार जी।।
2. जन्म जन्म की बिछुड़ी रुह को अपने संग मिलावे।
गुप्त खज़ाना भक्ति वाला घट भीतर दर्शावे।
काल के भय से मुक्त कराकर सतमार्ग दर्शाकर।
करे जीव को पल में निहाल करे मालामाल।
देकर अपना प्यार जी।।
3. तेरे एहसानों का बदला नहीं चुकाया जाये।
तन मन धन को करके हवाले फिर भी दिल सकुचाये।
दासनदास कोअपना बनाकर चरण शरण में लगाकर।
दिया खोल भक्ति का भण्डारा जिसमें हैं सुख भारा।
जो आवे श्रद्धा धार जी।।
टेक--सतगुरु तेरी शरण में जो आये दुखड़े गँवाये।
पाये सुख सार जी, होवे दूर सकल अँधियार जी।।
1. तेरी चर्चा फैली जहाँ में जाने जमाना सारा।
मोह से आज़ाद जीवों को करना ये है काम तुम्हारा।
जन्म जन्म बिगड़ी सारी मन की व्याधा भारी।
गम चिन्ता से होवे किनारा जाये दुःख सारा।
जो आवे चरणार जी।।
2. जन्म जन्म की बिछुड़ी रुह को अपने संग मिलावे।
गुप्त खज़ाना भक्ति वाला घट भीतर दर्शावे।
काल के भय से मुक्त कराकर सतमार्ग दर्शाकर।
करे जीव को पल में निहाल करे मालामाल।
देकर अपना प्यार जी।।
3. तेरे एहसानों का बदला नहीं चुकाया जाये।
तन मन धन को करके हवाले फिर भी दिल सकुचाये।
दासनदास कोअपना बनाकर चरण शरण में लगाकर।
दिया खोल भक्ति का भण्डारा जिसमें हैं सुख भारा।
जो आवे श्रद्धा धार जी।।
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