तर्ज़--तुम अगर साथ देने-----।
टेक--नहीं तुझको हमेशा ये मानुष जन्म।
इस चौरासी के चक्कर में मिल पायेगा।
अपनी रूह का भी कल्याण सोच ज़रा।
नहीं तो अवसर ये यूँ ही निकल जायेगा।।
1. असली मकसद को अपने तू भूल गया।
पाके रूप जवानी तू फूल गया।
ढलते सूरज की मानिन्द इक शाम को।
आखिर तेरा यह जीवन भी ढल जायेगा।।
2. मिला था शरीर ये नौकर तुझे।
इसने उल्टा बनाया है चाकर तुझे।
सार चीज़ मगर जीव आत्मा है।
सतपुरुषों से ज्ञान इसका मिल जायेगा।।
3. सारे कर्मों का खाता लिखा जाता है।
कर्म फल से कोई न बच पाता है।
सच्ची दरगाह में रिश्वत न सिफारिश चले।
फैसला सुन तेरा दिल दहल जायेगा।।
4. शब्द रूपी पारस से कंगाली मिटा।
स्वाँस रुपी लोहे को तू कंचन बना।
हो जायेगा जन्म तेरा सार्थक।
और दास मुकद्दर बदल जायेगा।।
टेक--नहीं तुझको हमेशा ये मानुष जन्म।
इस चौरासी के चक्कर में मिल पायेगा।
अपनी रूह का भी कल्याण सोच ज़रा।
नहीं तो अवसर ये यूँ ही निकल जायेगा।।
1. असली मकसद को अपने तू भूल गया।
पाके रूप जवानी तू फूल गया।
ढलते सूरज की मानिन्द इक शाम को।
आखिर तेरा यह जीवन भी ढल जायेगा।।
2. मिला था शरीर ये नौकर तुझे।
इसने उल्टा बनाया है चाकर तुझे।
सार चीज़ मगर जीव आत्मा है।
सतपुरुषों से ज्ञान इसका मिल जायेगा।।
3. सारे कर्मों का खाता लिखा जाता है।
कर्म फल से कोई न बच पाता है।
सच्ची दरगाह में रिश्वत न सिफारिश चले।
फैसला सुन तेरा दिल दहल जायेगा।।
4. शब्द रूपी पारस से कंगाली मिटा।
स्वाँस रुपी लोहे को तू कंचन बना।
हो जायेगा जन्म तेरा सार्थक।
और दास मुकद्दर बदल जायेगा।।
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