Friday, January 8, 2016

11.01.2016

तर्ज़--देखो रे दीवानो-----।
टेक--नाम ही साचे सुख का भण्डार।
                भव सागर से करता है पार।।

1.            नाम से बिगड़े काज सँवरते जन्म जन्म के रोग हैं टलते।
                ऐसी ये अचूक दवा है कर देती पल भर में शफा है।
                  दिल से जो भी इससे करता है प्यार।।

2.            दरगाह में भी पाये वो मान जपता जो इसको आठोंयाम।
                सब सन्तों और ग्रन्थों ने भी नाम की महिमा बताई है ऊँची।
                इसमें खुशियाँ भरीं बेशुमार।।

3.            अटल विधान विधि ने बनाया नाम बिना सुख किसी ने न पाया।
                चाहे कितना हो चतुर सयाना सच्ची दरगाह में चले न बहाना।।
                 क्यों न कर लेवे चाहे यत्न हज़ार।।

4.            नाम को जपना काम है अपना बाकी सब जग झूठ का सपना।
                पूँजी ये परलोक की प्यारे दास तू हर पल इसको ध्या ले।
                 सारे जग का ये ही आधार।।

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