तर्ज़--दिल में न जाने-----।
टेक--दिल मेरा मुहब्बत से गुलज़ार कीजिए।
बस इतना कर्म मुझपर सरकार कीजिए।।
1. भक्ति की राह में मैं कहीं डगमगा न जाऊँ।
रस्ते के दूर सतगुरु सब खार कीजिए।।
2. कर दी हवाले तेरे मैंने ज़िन्दगी की कश्ती।
बन नाखुदा ऐ सतगुरु इसे पार कीजिए।।
3. जन्मों तलक उठाये हैं दुःख दर्द घनेरे।
रखकर शरण में अपनी उपकार कीजिए।।
4. सिवा आपके न दिल को कोई और चीज़ भाये।
उल्फत में ऐसा दिल को गिरफ्तार कीजिए।।
टेक--दिल मेरा मुहब्बत से गुलज़ार कीजिए।
बस इतना कर्म मुझपर सरकार कीजिए।।
1. भक्ति की राह में मैं कहीं डगमगा न जाऊँ।
रस्ते के दूर सतगुरु सब खार कीजिए।।
2. कर दी हवाले तेरे मैंने ज़िन्दगी की कश्ती।
बन नाखुदा ऐ सतगुरु इसे पार कीजिए।।
3. जन्मों तलक उठाये हैं दुःख दर्द घनेरे।
रखकर शरण में अपनी उपकार कीजिए।।
4. सिवा आपके न दिल को कोई और चीज़ भाये।
उल्फत में ऐसा दिल को गिरफ्तार कीजिए।।
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