Wednesday, January 6, 2016

तर्ज़--दिल में न जाने-----।
            टेक--दिल मेरा मुहब्बत से गुलज़ार कीजिए।
                       बस इतना कर्म मुझपर सरकार कीजिए।।

            1.        भक्ति की राह में मैं कहीं डगमगा न जाऊँ।
                      रस्ते के दूर सतगुरु सब खार कीजिए।।

            2.        कर दी हवाले तेरे मैंने ज़िन्दगी की कश्ती।
                      बन नाखुदा ऐ सतगुरु इसे पार कीजिए।।

            3.        जन्मों तलक उठाये हैं दुःख दर्द घनेरे।
                      रखकर शरण में अपनी उपकार कीजिए।।

            4.        सिवा आपके न दिल को कोई और चीज़ भाये।
                      उल्फत में ऐसा दिल को गिरफ्तार कीजिए।।

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