Friday, January 8, 2016

09.01.2016

तर्ज़--सीता राम कहो राधेश्याम कहो----।
टेक--सच्चे पातशाह मेरी बख्श खता मैं निमाणा।
                          तू बेअन्त तेरा अन्त न जाना।।

1.            दीन छोड़ दूनी संग लागा नाम न जपया तेरा मैं अभागा।
                कोई गुण न पल्ले नरक न मैनूँ झले पाप कमाना।।

2.            मैनूं लगे न माया दा झोला अपने दर दा बना लो गोला।
                हरदम बन्दगी कराँ तेरी हाजरी भराँ जब तक प्राणाँ।।

3.            दर तेरे सवाली जो आवे मुँह मँगियां मुरादाँ ओह पावे।
                मैं आया शरणीं लावो अपनी चरणीं विरद पछाना।।

4.            तर गये पापी तेरा नाम रट के कटी जाये चौरासी जाप जपके।
                विसर नाहीं दातार बख्शो चरणाँ दा प्यार नाम जपाना।।

5.            रखना मैनूं कुसंग तों बचा के हरजी रखना गले नाल लाके।
                रहो अँग सँग मेरे बना लो अपने चेरे उपकार कमाना।।

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