तर्ज़--तुम्हें भूलना जो चाहा----।
टेक--रहमत का तेरी सतगुरु मिलता रहे सहारा।
कोई भी संगी साथी तुझ बिन नहीं हमारा।।
1. तेरी शरण में आके तकदीर है जगाई।
नहीं जीत हार देखी बाजी है जब लगाई।
केवल तू ही है प्रीतम आँखों का मेरी तारा।
2. करूँ तुझसे प्यार ऐसे जैसे चाँद से चकोरा।
गैरों की प्रीति से है अब अपने मन को मोड़ा।
आँखों से तेरे नाम की रहे बहती प्रेम धारा।
3. दिल आप से लगा के खुद से हुआ बेगाना।
श्री चरणों में मिला है जब से प्रभु ठिकाना।
मेरा दिल दीवाना चाहे तेरे प्रेम का इशारा।
4. मेरे मन के मन्दिर बसे मूर्ति तुम्हारी।
रहूँ हरदम निहारता मैं छवि तेरी प्यारी प्यारी।
नज़रों के आगे दास की रहे भगवन तेरा नज़ारा
टेक--रहमत का तेरी सतगुरु मिलता रहे सहारा।
कोई भी संगी साथी तुझ बिन नहीं हमारा।।
1. तेरी शरण में आके तकदीर है जगाई।
नहीं जीत हार देखी बाजी है जब लगाई।
केवल तू ही है प्रीतम आँखों का मेरी तारा।
2. करूँ तुझसे प्यार ऐसे जैसे चाँद से चकोरा।
गैरों की प्रीति से है अब अपने मन को मोड़ा।
आँखों से तेरे नाम की रहे बहती प्रेम धारा।
3. दिल आप से लगा के खुद से हुआ बेगाना।
श्री चरणों में मिला है जब से प्रभु ठिकाना।
मेरा दिल दीवाना चाहे तेरे प्रेम का इशारा।
4. मेरे मन के मन्दिर बसे मूर्ति तुम्हारी।
रहूँ हरदम निहारता मैं छवि तेरी प्यारी प्यारी।
नज़रों के आगे दास की रहे भगवन तेरा नज़ारा
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