Sunday, January 31, 2016

हर हाल में सतगुरु का जो....


टेक--हर हाल में सतगुरु का जो शुक्र मनाते हैं।
     उनके घर खुशियों की होती बरसातें हैं।।

1.     है याद जिन्हें दाता हर दात मिले उनको।
             बिन माँगें खुशियों की सौगात मिले उनको।।
                जो सुख को पाकर के नही मन भरमाते हैं।।

2.    हर सुख देने वाले दाता ने नहीं भूलें।
             सतसंग की खुशियों के झूले में सदा झूलें।
                सतगुरु को बसा दिल में फूले न समाते हैं।।

3.    ज्यादा में शुक्र कीजे थोड़े में सब्रा कीजै।
             फिर उनकी रहमत को दामन में भर लीजैं।
                ये शिक्षा जो माने वही सुख को पाते हैं।।
        सतगुरु के वचनों को जो दिल में बसाते हैं
        उनके घर खुशियों की होती बरसातें हैं।।

Saturday, January 30, 2016

किवें मुखड़े तों नज़रां हटांवाँ


तर्ज़-निराला कोई पीर आ गया----।
टेक-किवें मुखड़े तों नज़र हटावाँ कि तूँ ही मैनूँ रब दिसदा।
    दिल करदा ए तैनूँ बेखीं जावां कि तूँ ही मैंनूं रब दिसदा।
 
    1. पहला कम्म इबादत तेरी।
          नज़र मेहर दी हो जाये तेरी।
             असीं तेरे कोलों उठे नहीं जाना।

    2. रूप तेरे दी मैं खैर मनावाँ।
          जे सद लवें ते मैं सदके जावाँ।
             तेरे चरणाँ विच ज़िन्दगी बितावाँ।।
 
    3. तेरी किरपा ते तेरा साया।
          तू मैनूँ चरणाँ दे विच लाया।
             तैनूँ छड के केहड़े दर जावाँ।।

    4. तू हैं मेरा ते मैं हाँ तेरी।
          तेरे चरणां व्च निभ जाये मेरी।
             तेरा द्वारा मैं छडके नहीं जाना।।

Friday, January 29, 2016

रहमत का तेरी सतगुरु मिलता रहे सहारा

    तर्ज़--तुम्हें भूलना जो चाहा----।
            टेक--रहमत का तेरी सतगुरु मिलता रहे सहारा।
             कोई भी संगी साथी तुझ बिन नहीं हमारा।।

            1.            तेरी शरण में आके तकदीर है जगाई।
                           नहीं जीत हार देखी बाजी है जब लगाई।
                            केवल तू ही है प्रीतम आँखों का मेरी तारा।

            2.            करूँ तुझसे प्यार ऐसे जैसे चाँद से चकोरा।
                           गैरों की प्रीति से है अब अपने मन को मोड़ा।
                           आँखों से तेरे नाम की रहे बहती प्रेम धारा।

            3.            दिल आप से लगा के खुद से हुआ बेगाना।
                           श्री चरणों में मिला है जब से प्रभु ठिकाना।
                           मेरा दिल दीवाना चाहे तेरे प्रेम का इशारा।

            4.            मेरे मन के मन्दिर बसे मूर्ति तुम्हारी।
                           रहूँ हरदम निहारता मैं छवि तेरी प्यारी प्यारी।
                           नज़रों के आगे दास की रहे भगवन तेरा नज़ारा

Wednesday, January 27, 2016

अवसर मिला तुझे नर तन का....

    तर्ज़-दिल का खिलौना----।
    टेक-अवसर मिला तुझे नर तन का।
            वक्त यही है प्यारे सुमिरण भजन का।।

    1.    चौरासी लाख में श्रेष्ठ यह तन है।
            सच पूछो तो अनमोल रतन है।
                जप नाम तू निसबासर, संयोग बना है सुन्दर।
                    मौका है यह प्रभु से मिलन का।।
    2.    झूठी दुनियाँ से दिल न लगाना।
            इस के धोखे से खुद को बचाना।
                करते हैं सन्त आगाह, बतलाते सीधी राह।
                    ले ले सहारा तू सन्त शरण का।।
    3.    चन्द स्वांस की प्यारे तेरी ज़िन्दगी है।
            बिनस जाए कब पता कुछ नहीं है।
                नाम प्रभु का जपना, काम तेरा है अपना।
                    लक्ष्य यही है इस जीवन का।।
    4.    सन्तों की शिक्षा मान ले दास।
            गुरु चरणों पे रख दृढ़ विश्वास।
                बिगड़ी बन जाए तेरी, पलक न लगती देरी।
                    खत्म होगा चक्कर आवागमन का।।

Tuesday, January 26, 2016

इस दरबार का झण्डा ....

तर्ज़-आओ बच्चो तुम्हें------।
टेक-इस दरबार का झण्डा सारी सृष्टि में लहराय रहा।
      परम शान्ति सुख पाता प्राणी, इस दर पे जो आये रहा।।

1.दिन दुगनी और रात चौगुनी, आनन्दपुर की शान है।
        प्रेंमी भक्त जनों के घट में, फकत गुरु का मान है।
            परमहँस निर्माता इसके, तभी तो यह हर्षाय रहा।।

2.महातीर्थ आनन्द सरोवर, सब तीर्थों का ताज है।
        सदा खेलता अठखेली में, इस पे उसको नाज़ है।
            त्रिभुवन मोहन सतगुरु उससे, अपने चरण धुलाय रहा।।

3.इस नगरी के कण कण में, कोई ऐसा तेज निराला है।
        जो इसकी रज भाल चढ़ाता, दर्जा उसका आला है।
            जन जन इस की महिमा अनुपम,निज मुख से है गाय रहा।।

4.विधि हरि हर और शेष-शारदा यश गा गा कर हारे हैं।
        भवसागर में बहते प्राणी, लाखों पार उतारे हैं।
            चौदह भुवनों में है सुन्दर, दासनदास सुनाय रहा।।

Monday, January 25, 2016

तर्ज़-दो भक्ताँ नूँ फोटो----।
टेक-तेरे चरणों में सर रख दिया है, भार ये उठाना पड़ेगा।
        जैसा तैसा हूँ दाता मैं तेरा, चरणों से लगाना पड़ेगा।।

1.    मैं जीव हूँ तेरे सहारे, जग से न्यारे हैं तेरे नज़ारे।
        आज खोलो इलाही भण्डारा, जाम मुझको पिलाना पड़ेगा।।

2.    मैंने तन मन तुझपे लुटाया, अपना साथी है तुझको बनाया।
        हम तेरे हैं तेरे रहेंगे, मुझको अपना बनाना पड़ेगा।।

3.    मैंने तुझ संग नेह लगाया, सारी दुनियाँ को मैंने भुलाया।
        इक सतगुरु जी हैं मेरे अपने, सारे जग को सुनाना पड़ेगा।।

4.    तेरे उपकार भूल न सकते, करके दीदार दुःख सारे कटते।
        दास ने चरण पकड़े हैं तेरे, अब तो नाता निभाना पड़ेगा।।

मेहरबाँ तुझसा न देखा कोई भी संसार में।


       है भरी रहमत ही रहमत सतगुरु तेरे प्यार में।।
              पार बहरेदहर से फिर वो यकीनन हो गया।
              दे दिया जिसने सफीना बस तेरे इख्तियार में।।
       मन को अपनी ज़िन्दगी की सौंपी जिस पतवार है।
       उसका बेड़ा एक दिन डूबेगा फिर मँझधार में।।
              दुःख दर्द रंज़ो अलम सब उसके हो जाते हैं दूर।
              छोड़ उल्फत दुनियां की जो आ गया दरबार में।।
       ज़िन्दगी भरपूर रहती है सकूनो चैन से।
       सुरति जिसने जोड़ दी सतगुरु तेरे दीदार में।।
              तू है बख्शिश का मुजस्मा तेरी शोहरत आम है।
              गलतियां हरगिज़ न लाते किसी की शुमार में।।
       बनके राहबर तुमने ही मुझको बचाया सतगुरु।
       भटकता रहता वगरना दुनियां ए पुरखार में।।
              हैं तेरे एहसान कितने मैं बयां कैसे करूँ।
              है कहाँ ताकत ज़ुबां में लाये जो इज़हार में।।
       साया ए रहमत में अपने तूने दी मुझको पनाह।
       नुक्स हैं माना बहुत इस ना-अहल गुनाहगार में।।
              जाम इक उल्फत का अपने दास को भी बख्श दे।
              क्या कमी होगी भला तेरे भरे भण्डार में।।

Sunday, January 24, 2016

तेरी रहमत का अधिकारी बनूँ दिल की तमन्ना है।

तर्ज़--मुझे तेरी मुहब्बत का-----।
टेक--तेरी रहमत का अधिकारी बनूँ दिल की तमन्ना है।
                सिवा इसके न कुछ चाहूँ फक्त इतनी सी चाहना है।।

1.            न देखो जी गुनाह मेरे कि मैं हर पल हूँ भूलनहार।
                    देखना अपनी रहमत को कि दाता तुम हो बख्शनहार।
                        तेरे चरणों में सतगुरु जी मेरी बस ये ही प्रार्थना है।।

2.            कर्म निशदिन करूँ ऐसे सदा जो तुझको भाते हों।
                    जीवन में संग हो उनका जो दिल से तुमको ध्याते हों।
                        रिझाऊँ तुमको ही भगवन यही दिल की भावना है।।

3.            मेरे लब पे हो चर्चा बस तुम्हारे नाम की सतगुरु।
                    तुम्हारे ध्यान में हरदम रहे लवलीन मेरा मन।
                        नहीं कुछ और चाहिये मुझे केवल तेरी कामना है।।

4.            जीवन की कश्ती को तेरे हवाले कर दिया मैनें।
                    क्यों न मैं बेफिकर होऊँ थामी पतवार जो तूने।
                        दास का जीवन सफल हुआ मिला जो तुझसा राहनुमा है।।

Saturday, January 23, 2016

प्रभु नाम हिरदे में...

तर्ज़-अच्छा सिला दिया-----।
            टेक-प्रभु नाम हिरदे में धारो प्रेमियों।
                    नाम बिन झूठे हैं पसारे प्रेमियों।।

            1.    नाम से संवरते हैं बिगड़े काज।
                    नाम ही भव तरने का जहाज़।
                        इक पल इसें न विसारो प्रेमियों।
                            जीवन ये अपना संवारों प्रेमियों।।
            2.    जिसनें भी घट में बसाया नाम को।
                    पा लिया उसने सच्चे धाम को।
                        मिलते हैं प्रेम के हुलारे प्रेमियों।
                            नाम बिन झूठे हैं सहारे प्रेमियों।।
            3.    नाम जो जपे हरि को पावे।
                    लोक परलोक संवर जावें।
                        रहते वो जग से न्यारे प्रेमियों।
                            नाम बिन झूठे हैं पसारे प्रेमियों।।
            4.    दासन हर पल नाम सम्भाल।
                    कोड़ियों के बदले खो न लाल।
                        सब कुछ इस पर वारो प्रेमियों।
                            जीवन ये अपना सँवारो प्रेमियों।।

Thursday, January 21, 2016

अपने चरणों का देके सहारा....

तर्ज़--हँसता हुआ नुरानी------।
  टेक--अपने चरणों का देके सहारा दूर किया है दुख गम सारा।
     मोह बन्धनों से छुड़वा करके किया आज़ाद।।
 
  1.महफिल जब से तुम्हारी है पाई जन्म मरण की पीर गँवाई।
        भव में डूबे जाते थे हम आके बचाया तुमने भगवन।
                    देकर नाम जहाज।।
 
  2.सच झूठ का हमको ज्ञान कराया भूले थे हम सही मार्ग दिखाया।
        पल में हमारी हालत बदली रहमत की इक दृष्टि कर दी।
                    जागे हमारे भाग।।
 
  3.सब मुश्किलें टल गर्इं मेरे सर से जब से मैं आया प्रभु तेरे दर पे।
        रंक को कर दिया धनवान देकर प्रेम भक्ति का दान।
                     जग से किया बेमुहताज।।
 
  4.दास सदा चरणों पे बल बल जाये रैन दिवस गुणवाद तेरे गाये।
        एहसान मुझपे किया जो भारी डूबती मेरी नैया बचा ली।
                    मेरे सँवारे सब काज।।

तर्ज़-- सबसे सुन्दर सबसे प्यारा-------।

तर्ज़--    सबसे सुन्दर सबसे प्यारा-------।
टेक--    दीना बन्धु करुणा सागर रहमत के भण्डार।
         बड़ी ही आशा लेकर आया दाता तेरे द्वार।
            ज़रा सा रहम कमा दो प्यास जन्मों की बुझा दो।।
   
1.    आ करके इस दर से कोई गया न खाली।
          ऊँची शान सुनकर आया मैं भी सवाली।
              पूरी कर दो दिल की तमन्ना ऐ मेरी सरकार।।
   
2.    कमी नहीं कुछ भी है तेरे इस मयखाने में।
          कर दो नज़र इनायत अपने इस दीवाने पे।
               जन्म जन्म नहीं भूलूँगा तेरा ये उपकार।।
   
3.    भर भर के जाम सबको पिलाये जाते हो।
          किस कारण अब हमरी बारी में देर लगाते हो।
              आज तो पीना है ज़रूर मत करो इन्कार।।

4.    होश रहे न बाकी चढ़ जाये ऐसी खुमारी।
          मान लो अब दाता छोटी सी विनय हमारी।
               दास खड़ा तेरे दर पे लेकर तेरा आधार।।

Wednesday, January 20, 2016

भजन- मेरे दिल में तेरी भक्ति

तर्ज़--न झटको जुल्फ से पानी--।
टेक--मेरे दिल में तेरी भक्ति को पाने की तमन्ना है।
     मेरे मुर्शिद तुझे अपना बनाने की तमन्ना है।।

1.   ये सिर तेरी अमानत है झुकेगा क्यों कहीं जाकर।
     इसे तेरे ही कदमों में झुकाने की तमन्ना है।।

2.   मुझे थी जुस्तजू जिसकी वह दाता तुम्हीं तो हो।
     तुम्ही को दिल के आसन पर बिठाने की तमन्ना है।।

3.   श्री चरणों में भक्ति प्रेम के दरिया मचलते हैं।
     श्री चरणों के सागर में नहाने की तमन्ना है।।

4.   बिछाया जो ना था अब तक किसी के सामने हरगिज़।
     वही दामन तेरे दर पर बिछाने की तमन्ना है।।

Tuesday, January 19, 2016

भजन 19.01.2016

तर्ज़- आ लौट के आजा मेरे मीत------।
टेक- आ दर्श दिखा दे गुरुदेव तुझे तेरे लाल(दास) बुलाते हैं।
     तुझे रो रो पुकारें मेंरे नैयन, तुझे तेरे दास बुलाते हैं।।

1.   आँखों के आँसूं  सूख चुके हैं, अब तो दर्श दिखा दे।
         कब से खड़े हैं दर पर तेरे, मन की तू प्यास बुझा दे।
             तेरी लीला निराली गुरुदेव, तुझे तेरे दास बुलाते हैं।

2.   बीच भँवर में नैया पड़ी है, आकर तू पार लगा दे।
         तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है, चरणों से आके लगा ले।
             क्यों देर लगाते गुरुदेव, तुझे तेरे दास बुलाते हैं।।

3.   डूब रहा है सुख का सूरज, गम की बदरिया है छाई।
         उजड़ गई है जीवन की बगिया, मन की कली मुरझाई।
             करे विनती ये बालक आज, तुझे तेरे दास बुलाते हैं।।

4.   वैसे तो तुम हो मन में हमारे, आँखें नहीं मानती हैं।
         इक पल गुरु से ये बिछुड़ कर, रहना नहीं चाहती हैं।
              बरबस बरसायें नीर, तुझे तेरे दास बुलाते हैं।।

Monday, January 18, 2016

भजन- जीवन की शाम जा रही है----

तर्ज़-याद आ रही है----।
टेक-शाम जा रही है यह रात जा रही है।
     इसी तरह तेरे जीवन की हर बात जा रही है।।

1.कई जन्मों के बाद में यह मानुष चोला है मिला।
    पर तूने न जाना किस करम से तुझको है मिला।
      ज़िन्दगी तेरी अज्ञान वश बर्बाद जा रही है।।

2.पग पग पर हैं कांटे माया ने जाल बिछा दिये।
    मोह ममता विषयों ने तुझ पर हैं जादू चला दिये।
      दुनियाँ की हर शै तुझको तो भरमा रही है।।

3.इसी तरह यूँ व्यर्थ ही तेरा यह जीवन बीत चला।
    क्या करना था तुझको और कर क्या बैठा नही पता।
      पछताने से बीती घड़ी नहीं वापिस आ रही है।।

4.अब भी सँभल जा""प्रेमी''यह सन्त तुझे समझा रहे।
    ओट पकड़ सतगुरु की यह भेद तुझे बतला रहे।
      नाम तू जप सतसंग में आ जो काम आ रही है।।

Saturday, January 16, 2016

16.01.2016

तर्ज़--फिरकी वाली तू------।
        टेक--सतगुरु तेरी शरण में जो आये दुखड़े गँवाये।
                   पाये सुख सार जी, होवे दूर सकल अँधियार जी।।

1.    तेरी चर्चा फैली जहाँ में जाने जमाना सारा।
       मोह से आज़ाद जीवों को करना ये है काम तुम्हारा।
         जन्म जन्म बिगड़ी सारी मन की व्याधा भारी।
           गम चिन्ता से होवे किनारा जाये दुःख सारा।
                             जो आवे चरणार जी।।
2.    जन्म जन्म की बिछुड़ी रुह को अपने संग मिलावे।
       गुप्त खज़ाना भक्ति वाला घट भीतर दर्शावे।
      काल के भय से मुक्त कराकर सतमार्ग दर्शाकर।
              करे जीव को पल में निहाल करे मालामाल।
                                  देकर अपना प्यार जी।।
3.    तेरे एहसानों का बदला नहीं चुकाया जाये।
     तन मन धन को करके हवाले फिर भी दिल सकुचाये।
       दासनदास कोअपना बनाकर चरण शरण में लगाकर।
         दिया खोल भक्ति का भण्डारा जिसमें हैं सुख भारा।
                          जो आवे श्रद्धा धार जी।।

Friday, January 8, 2016

15.01.2016

तर्ज़--मैं तो सतगुरु के ------।
                टेक--करूँ बन्दगी मैं निशदिन तुम्हारी।
                         दिल में चाह ये भारी।।

                1.        सेवा भक्ति में चित को लगाऊँ।
                          इक पल भी न व्यर्थ गवाऊँ।
                            बीते चरणों ज़िन्दगी सारी।।
                2.        निसदिन ह्मदय मन्दिर को सजाकर।
                          उसमें ध्यान तुम्हारा बसा कर।।
                            छवि हर पल देखूँ ये प्यारी।।
                3.        नाम से घट में होवे उजेरा।
                          मिट जाये माया का अन्धेरा।
                            भक्ति दे दो मुझे ऐसी प्यारी।।
                4.        करे रसना तेरा गुणगान।
                          और दिल में तुम्हारा ध्यान।
                            चरणों पे जाऊँ बलिहारी।।
                5.        श्री आज्ञा को सीस चढ़ाऊँ।
                          रैन दिन बस तुमको रिझाऊँ।
                            दास रहमत का है भिखारी।।

14.01.2016

     तर्ज़--मेहरां वालिया सार्इंया----।।
     टेक--मेरे सच्चे साहिबा वसीं अखियाँ दे कोल।
                           वसीं नैयनां दे कोल।।

     1.   जिसदे कोल वसें तू सीर्इंयां ओहनूं कादियाँ कमियाँ।
          प्रेम दे सागर विच ओ रूहाँ रहंदियां हरदम रंगियाँ।।
                            चित चरणां विच जोड़।।

     2.   तेरे जलवे नाल ही रोशन दुनियाँ मेरे दिल दी।
          प्यार तेरे दी मेरे मन विच जगी रहे ज्योति।
                            होर कुझ वी न लोड़।।

     3.   असीं निमाणें भुलनहारे वेखीं ना साडे अवगुण।
           रहमत दे भण्डारी दाता देवीं जल्दी दर्शन।।
                            जावण मन न डोल।।

     4.   चरण कमल विच वेनती मेरी हो जावे परवान।
          अपना सेवक जाण के रखीं दास दा माण।

13.01.2016

तर्ज़--नैनों से नैन मिले चार----।
            टेक--खुशियों का दिन है आज सतगुरु स्वामी मिले।
                            धन्य हमारे भाग सतगुरु स्वामी मिले।।

            1.            आई घड़ी ये कैसी सुहानी।
                                            देखी जो तेरी जोत नूरानी।
                                                            नयन सफल हुये आज।।
            2.             शुभ कर्मों से समय शुभ आया।
                                            पाकर दर्शन भाग मनाया।
                                                            पूर्ण हुये सब काज।।
            3.            दर्शन पाकर मन तृप्ताया।
                                            सहजे ही सुख आनन्द छाया।
                                                            पाया है चैन करार।।
            4.            ऐसी किरपा निशदिन कीजै।
                                            श्री चरणों की प्रीति दीजै।
                                                            होता रहे ये दीदार।।
            5.            सबको मुबारक हो ये घड़ियाँ।
                                            मिलती रहें सदा ऐसी ही खुशियाँ।
                                                                            दासन दास बलिहार।।

12.01.2016

तर्ज़--दिल के अरमाँ-----।
                    टेक--संगति में आ के तू सतपुरुषों की।
                                    सीख ले युक्ति तू उनसे जीने की।।

                    1.            जिस सुख की तलाश में तू दौड़ रहा।
                                                सतगुरु के चरणों में है वो सुख भरा।
                                                                तार चरणों से जोड़ दे सुरति की।।

                    2.            सत और झूठ का वो ज्ञान करवाते हैं।
                                                निजघर का रास्ता तुझे दिखलाते हैं।
                                                                भक्ति मुक्ति उनके चरणों में पड़ी।।

                    3.            जिसने इस नुक्ते को दिल में बसा लिया।
                                                जीवन के मकसद को उसने पा लिया।
                                                                रहती फिर उसको कुछ भी न कमी।।

                    4.            मान ले ये बात सन्तों की तू ऐ बशर।
                                                आसान हो जायेगा तेरा ये सफर।
                                                                पायेगा मन्ज़िल को तू फिर निश्चय ही।।

11.01.2016

तर्ज़--देखो रे दीवानो-----।
टेक--नाम ही साचे सुख का भण्डार।
                भव सागर से करता है पार।।

1.            नाम से बिगड़े काज सँवरते जन्म जन्म के रोग हैं टलते।
                ऐसी ये अचूक दवा है कर देती पल भर में शफा है।
                  दिल से जो भी इससे करता है प्यार।।

2.            दरगाह में भी पाये वो मान जपता जो इसको आठोंयाम।
                सब सन्तों और ग्रन्थों ने भी नाम की महिमा बताई है ऊँची।
                इसमें खुशियाँ भरीं बेशुमार।।

3.            अटल विधान विधि ने बनाया नाम बिना सुख किसी ने न पाया।
                चाहे कितना हो चतुर सयाना सच्ची दरगाह में चले न बहाना।।
                 क्यों न कर लेवे चाहे यत्न हज़ार।।

4.            नाम को जपना काम है अपना बाकी सब जग झूठ का सपना।
                पूँजी ये परलोक की प्यारे दास तू हर पल इसको ध्या ले।
                 सारे जग का ये ही आधार।।

10.01.2016

तर्ज़--तुम अगर साथ देने-----।
            टेक--नहीं तुझको हमेशा ये मानुष जन्म।
                                    इस चौरासी के चक्कर में मिल पायेगा।
                                        अपनी रूह का भी कल्याण सोच ज़रा।
                                                नहीं तो अवसर ये यूँ ही निकल जायेगा।।
            1.            असली मकसद को अपने तू भूल गया।
                                    पाके रूप जवानी तू फूल गया।
                                        ढलते सूरज की मानिन्द इक शाम को।
                                                आखिर तेरा यह जीवन भी ढल जायेगा।।
            2.            मिला था शरीर ये नौकर तुझे।
                                    इसने उल्टा बनाया है चाकर तुझे।
                                        सार चीज़ मगर जीव आत्मा है।
                                                सतपुरुषों से ज्ञान इसका मिल जायेगा।।
            3.            सारे कर्मों का खाता लिखा जाता है।
                                    कर्म फल से कोई न बच पाता है।
                                        सच्ची दरगाह में रिश्वत न सिफारिश चले।
                                                फैसला सुन तेरा दिल दहल जायेगा।।
            4.            शब्द रूपी पारस से कंगाली मिटा।
                                    स्वाँस रुपी लोहे को तू कंचन बना।
                                        हो जायेगा जन्म तेरा सार्थक।
                                                और दास मुकद्दर बदल जायेगा।।       

09.01.2016

तर्ज़--सीता राम कहो राधेश्याम कहो----।
टेक--सच्चे पातशाह मेरी बख्श खता मैं निमाणा।
                          तू बेअन्त तेरा अन्त न जाना।।

1.            दीन छोड़ दूनी संग लागा नाम न जपया तेरा मैं अभागा।
                कोई गुण न पल्ले नरक न मैनूँ झले पाप कमाना।।

2.            मैनूं लगे न माया दा झोला अपने दर दा बना लो गोला।
                हरदम बन्दगी कराँ तेरी हाजरी भराँ जब तक प्राणाँ।।

3.            दर तेरे सवाली जो आवे मुँह मँगियां मुरादाँ ओह पावे।
                मैं आया शरणीं लावो अपनी चरणीं विरद पछाना।।

4.            तर गये पापी तेरा नाम रट के कटी जाये चौरासी जाप जपके।
                विसर नाहीं दातार बख्शो चरणाँ दा प्यार नाम जपाना।।

5.            रखना मैनूं कुसंग तों बचा के हरजी रखना गले नाल लाके।
                रहो अँग सँग मेरे बना लो अपने चेरे उपकार कमाना।।
तर्ज़--तुम्हे भूलना जो चाहा------।
            टेक--उपकार तेरे भगवन किस विधि करुँ बखान।
                            ऊँची है शान तेरी छोटी मेरी ज़ुबान।।

            1.            जन्मों जन्म से माया के चंगुल में फँस रहा था।
                                    चौरासी के चक्कर में फिर फिर भटक रहा था।
                                                दिये काट तूने बन्धन हो करके मेहरबान।।

            2.            देकर खज़ाना नाम का कर दिया मालामाल।
                                    सच्चा सरुर पाकर दिल हुआ खुशहाल।
                                                सारी सृष्टि में प्रभु नहीं तुम सा दयावान।।

            3.            निष्काम सेवा भक्ति की देते सबको शिक्षा।
                                    अपने विरद की हर पल करते हो आप रक्षा।
                                                संयम नियम से चलने का समझाते सच्चा ज्ञान।।

            4.            विनती ये दास की है चरणों के साये रखना।
                                    पाँचों विकारों से मुझे भगवन बचाये रखना।
                                                आठोंयाम दिल में बस तेरा ही हो माण।।

Thursday, January 7, 2016

    तर्ज़--जब हम जवाँ होंगे-----.
            टेक--जय जय बुलायेंगे सर को झुकायेंगे।
                            घर घर तेरे नाम का दीपक जलायेंगे।।

            1.            तेरे दर पे जीव हज़ारों आते हैं।
                                        पल भर में झोली भर ले जाते हैं।
                                                        हम भी तुम्हारे चरणों में दामन फैलायेंगे।।

            2.            द्वार तेरा बख्शिश का भण्डार है।
                                        नाम तेरा भवसागर उतारनहार है।
                                                        युग युग करो तुम राज हम हरदम चाहेंगे।।

            3.            निज भक्तों की खातिर आप पधारे हैं।
                                        सुन्दर सतगुरु भक्त जनों के प्यारे हैं।
                                                    सुन्दर छवि तेरी ये प्यारी दिल में बसायेंगे।।

            4.            दास की अर्ज़ी ऐ सतगुरु जी मन्ज़ूर करो।
                                        निज भक्ति से दिल मेरा भरपूर करो।
                                                        तेरी दया से ही तूझे भगवान पायेंगे।।

Wednesday, January 6, 2016

तर्ज़--दिल में न जाने-----।
            टेक--दिल मेरा मुहब्बत से गुलज़ार कीजिए।
                       बस इतना कर्म मुझपर सरकार कीजिए।।

            1.        भक्ति की राह में मैं कहीं डगमगा न जाऊँ।
                      रस्ते के दूर सतगुरु सब खार कीजिए।।

            2.        कर दी हवाले तेरे मैंने ज़िन्दगी की कश्ती।
                      बन नाखुदा ऐ सतगुरु इसे पार कीजिए।।

            3.        जन्मों तलक उठाये हैं दुःख दर्द घनेरे।
                      रखकर शरण में अपनी उपकार कीजिए।।

            4.        सिवा आपके न दिल को कोई और चीज़ भाये।
                      उल्फत में ऐसा दिल को गिरफ्तार कीजिए।।

Monday, January 4, 2016

टेक--हर हाल में सतगुरु का जो शुक्र मनाते हैं।

     उनके घर खुशियों की होती बरसातें हैं।।

1.     है याद जिन्हें दाता हर दात मिले उनको।

             बिन माँगें खुशियों की सौगात मिले उनको।।

                जो सुख को पाकर के नही मन भरमाते हैं।।

2.    हर सुख देने वाले दाता ने नहीं भूलें।

             सतसंग की खुशियों के झूले में सदा झूलें।

                सतगुरु को बसा दिल में फूले न समाते हैं।।

3.    ज्यादा में शुक्र कीजे थोड़े में सब्रा कीजै।

             फिर उनकी रहमत को दामन में भर लीजैं।

                ये शिक्षा जो माने वही सुख को पाते हैं।।

        सतगुरु के वचनों को जो दिल में बसाते हैं

        उनके घर खुशियों की होती बरसातें हैं।।