Monday, February 29, 2016

प्यार पा गया हूँ...

तर्ज़--याद आ रही है----।
टेक--प्यार पा गया हूँ तेरा प्यार पा गया हूँ।
     छोड़ के जग के रिश्ते नाते दरबार आ गया हूँ।।

1.यह दुनियाँ की राहें काटों ही काँटों से भरी।
    तेरे साथ मिला तो फूलों की गलियां बन गई।
      मन्ज़िल अपनी की मैं तो मीनार पा गया हूँ।।

2.माया वाले बन्धन मेरे आप ही आप टूट गये।
    तेरा नाम लिया तो सब दोष ही मेरे छूट गये।
      दुनियाँ के रंज़ो गम से मैं निज़ात पा गया हूँ।।

3.तेरे मिलन में ऐसी तासीर है सतगुरु भरी।
    की जन्मों की बिगड़ी तकदीर भी है बन गई।
      ""प्रेमी'' हूँ तेरे प्रेम का भण्डार पा गया हूँ।।

Sunday, February 28, 2016

नाम का रंग

तर्ज़-खईके पान बनारस वाला----।
टेक-नाम का रंग आप का पक्का सतगुरु दियो जाये।
    ऐसी कृपा करो जी हम पर जन्म सफल हो जाये।।
लईके नाम आपका आला,खुल जाये बन्द भाग्य का ताला।
नाम में ऐसा भरा कमाल,कि जिसकी कोई नहीं मिसाल।
                      नाम तेरा भव से तराने वाला।।
1.जप जप के तेरा नाम कई लाखों के भाग्य खुल गये।
  लिख लिख के तेरा नाम कई पत्थर भी पानी में तर गये।
  तेरा नाम है निराला, खुशियों को देने वाला।
                       लिया नाम तो हुआ निहाल।।

2.शख्स कोई भी चाहे जीवन को सफल बनाना।
  दिल में तेरी प्रीति और नाम पड़ेगा बसाना।
  तेरा नाम जो लब पर आये मन तुझमें ही खो जाये।
                       टूटे माया व मोह का जाल।।

3.हम हैं ""प्रेमी'' आपके जपे नाम दिल की हर धड़कन।
  ध्यान तेरा धरें हम तुझे देख मिटे हैं सभी गम।
  कुछ और न तुझसे चाहें बस तेरा प्यार ही पायें।
                       दाता रखना हमारा ख्याल।।

Friday, February 26, 2016

खुशी का नया इक सन्देशा आया

तर्ज़--मुझे प्यार की ज़िन्दगी ----।
                टेक--खुशी का नया इक है सन्देश आया।
                           सबके दिलों में आनन्द छाया।।

                1.        सुनी गलियों में छायेंगी बहारें।
                           पाकर दर्शन के सुखद नज़ारे।
                             दूर हो जायेगा गम का साया।।
               
     2.        मन की कल्पना मिट जायेगी।
                           विरह की ज्वाला बुझ जायेगी।
                             मिल जायेगी अब शीतल छाया।।

                3.        मुबारक मुबारक उनको मुबारक।
                           जिसने सुनाया खुशी का सन्देश।
                             व्याकुल दिल ने चैन है पाया।।

                4.        मिली जो खुशी आज करूं क्या ब्यान।
                           गूँगा गुड़ खाये क्या बतायेगी ज़ुबान।
                             दास ने कोटि कोटि शुक्र मनाया।।

Thursday, February 25, 2016

सतगुरु के प्यार में तू....

    तर्ज़--मिलती है ज़िन्दगी मे----।
    टेक--सतगुरु के प्यार मे तू खुद को मिटा के देख।
               कदमों में उनके अपना सब कुछ लुटा के देख।।
        1.        तेरी सूनी ज़िन्दगी में आ जायेगी बहार।
                 तस्वीर सतगुरु की दिल में बसा के देख।।
        2.        सतगुरु की मौज में ही रहने में है भला।
                 जिन्दगी को उनकी मौज मुताबिक बना के देख।।
        3.        तेरे रास्ते की सारी टल जायेंगी बला।
                 राहे मारफत में उनको राहबर बना के देख।
        4.     तेरे दिल की दुनियाँ होगी नूरे मारफत से रोशन।
                 दुई का पर्दा अपने दिल से उठा के देख।।
        5.        दुनियाँ के रंज़ो गम से तू पायेगा निज़ात।
                 तसव्वर में सतगुरु के खुद को भुला के देख।।
        6.        सोहबत में आरिफों की मिलता है सुख हकीकी।
                 महफिल में उनकी बन्दे इक बार आ के देख।।
        7.        हमदर्द जीव के हैं फक्त सतगुरु जहान में।
                 कदमों में उनके अपने दिल को लगा के देख।।
        8.        सतगुरु हैं मेहरबां ते सब जग है मेहरबाँ।
                 तू उनको दास अपना मेहरबाँ बना के देख।।

Tuesday, February 23, 2016

कभी तेरा साथ न छूटे सजन

तर्ज़-कभी तेरा दामन न-----।
टेक-कभी साथ तेरा न छूटे सजन।
       चाहे जमाना रूठे या छूटे ये तन।।

1.  बड़ी मुश्किलों से प्रभु तम्हें पाया।
       तेरा साथ पाने कहाँ से मैं आया।
          जुदा तेरे चरणों से कभी न हो हम।।
2.  मुहब्बत में तेरी सराबोर हूँ मैं।
       सदा तेरी रहमत का तलबगार हूँ मैं।
          गुज़रता है यादों में हमेशा जीवन।।
3.  तेरा राह में अपना सब कुछ लुटा दूँ।
       तेरी जुस्तज़ू में खुद को भुला दूँ।
          रहूँ तेरी खिदमत में सदा ही मगन।।
4.  आप से बिछुड़ कर कहां जाऊँगा मैं।
       जिन्दा ही क्यों कर रह पाऊँगा मैं।
          चैन भला क्यों कर पाऊँगा मैं।
             आप की ही खातिर मिला ये जन्म।।
5.  हर पल तुम्ही को दिल में बसाऊँ।
       हर शै में हर वक्त बस तुम्हें पाऊँ।
          रहूँ तेरा ""प्रेमी'' ही प्रभु हरदम।।

Monday, February 22, 2016

तर्ज़-शायद मेरी


टेक-दर्शन तेरा करके गुरु मन आनन्द छाया है।
     चरणों में तेरे आके सुख शाश्वत पाया है।।

1.सोचता था पहले तुझे कैसे मैं पाऊंगा।
    मन के सिंहासन में तुझे कैसे बिठलाऊँगा।
      अब कृपा हुई तेरी दरबार मैं आ पहुँचा।
        तुझ से थी प्रीत मेरी सरकार मैं आ पहुँचा।
          दिल के हर कोने में गुरु तू ही तो समाया है।

2.इससे पहले ज़िन्दगी में गम ही गम देखे।
    दे रहे थे हमको धोखा लगते जो अपने।
      पर जब से आप मिले सब दूर हुए दुखड़े।
        भ्रम बादल भी है छँटे हम चैन भी पाने लगे।
           कष्ट हरन दुःखभञ्जन तेरा नाम ध्याया है।।

3.""प्रेमी'' तेरा हूँ तुझी से प्रेम करता हूँ।
    मैं अहम सब त्याग मस्तक चरणों में धरता हूँ।
      जो भूल हुई मुझसे सब माफ कर देना।
        भक्ति सेवा अपनी का सतगुरु वर देना।
           तुझसा कामिल सतगुरु पा धनभाग्य मनाया है।

Sunday, February 21, 2016

मेरा दिलदार तू है.....

तर्ज़-रमैय्या वस्ता वैय्या----.
टेक-मेरा दिलदार है तू मेरा गमख्वार है तू।
      तुझ पे बलिहार जाऊँ, तुझपे बलिहार जाऊँ।।

1.तुझसे प्यार करुँ दिल निसार करूँ,तेरी उल्फत का मैं मस्ताना बनूँ।
    तेरे बिन और कहीं दिल को ठौर नहीं,तेरे चरणों का मैं दीवाना बनूँ।
                जग से तोड़ के अब, तुझ संग जोड़ के अब।
                            तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
2.अन्तर्यामी हो तुम मेरेस्वामी हो तुम तेरीरहमत का प्रभु पारावार नहीं।
    मैं इबादत करूँ तेरी खिदमत करुँ कुछ भी और मुझे दरकार नहीं।
                आया हूँ तेरी शरण, काट दो जन्म मरण।
                            तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
3.मेरा राहबर है तू और मुकद्दर है तू आस झूठे जगत की छोड़ी मैंने।
  जबसे तूहै मिला कमल दिलका खिला प्रीतकेवल तुम्हींसे हैजोड़ीमैने।
                मेरे सिरताज प्रभो, रखना लाज प्रभो।
                            तुझ पे बलिहार जाऊँ।।
4.तेरे आगे दातार दास करता पुकारअपने चरणों का बख्शो प्यार मुझे।
    ध्याऊं नाम तेरा यही हो काम मेरा कोई जग से न हो सरोकार मुझे।
                तू ही है नाथ मेरा, रहे संग साथ तेरा।
                            तुझ पे बलिहार जाऊँ।।

Saturday, February 20, 2016

आना ही पैणा हाराँ वालिया....

तर्ज़ः-पँख होते तो उड़ आती रे-----
 टेकः आना ह‏ी पैणा  ह‏ाराँ वालिया दिल दी आवाज़ सुन के।
       क्यों अजे तक मैनूं है टालिया।
1.   जदों दा साँवरे तैनू मैं तकिया, साँभ के दिल मैं तेरे लई रखिय़ा।
     नजर पई जद तेरी मेरे ते, आके दिल विच तू ह‏ी है वसिया।।
         दिल दी आवाज़ सुन के, क्यों अज़े तक मैनू है‏ टालिया।।

2. सोह‏ने मेरे दी सोहनी आदावाँ, वेख लवां ताँ ठर ठर जावाँ।
   सोह‏ने मुखड़े दा दीदार चाह‏वाँ, तार्इंयों मुड़ मुड़ झातियाँ पावाँ।।
         दिल दी आवाज़ सुन के, क्यों अज़े तक मैनू है‏ टालिया।।

3. रुप सोह‏णा दिल मेरा खोह‏वे, वख तैथों मैंनूं ह‏ोण न ह‏ोवे।।
 दिल करदा तैनू दिल विच वसावाँ, सोह‏णें साँवरे नूं अपना बनावाँ।।
         दिल दी आवाज़ सुन के, क्यों अज़े तक मैनू है‏ टालिया।।

Friday, February 19, 2016

गुरु चरणों में जिसका सम्बन्ध है...


टेकः-गुरु चरणों में जिसका सम्बन्ध है,
उसको हरदम आनन्द ही आनन्द है।।
     जो उसकी रज़ा में रज़ामन्द है, 
उसको हरदम आनन्द ही आनन्द है।।

1.   निन्दा चुगली न उसको सुहावे।
        झूठी संगत ना मन को भावे।।
            उसको सतसंग ही करना पसन्द है।। उसको हरदम----।।
2.   जो दुनियाँ से ना शरमावे।
        गुरु चरणों में ध्यान लगावे।।
            जिसके नैनी घमण्ड ना पखण्ड है।। उसको हरदम----।।
3.   झूठी दुनियां का छोड़ो सहारा।
        लै लो पूरे गुरां दा सहारा।।
            प्रेम भक्ति ही उसकी सौगन्ध है।। उसको हरदम----।।

Thursday, February 18, 2016

निष्काम सेवा बंदगी....

टेकः-निष्काम सेवा बन्दगी दिल से करता जा प्राणी।
     न जाने कब हो जायेगी संतों की मेहरबानी।।

1.   सतगुरु का कहना मान ले गफलत को छोड़ दे।
        जन्मों से बिछुड़ी सुरति को मालिक से जोड़ ले।।
          गुरुमति के साँचे में ढाल ले अपनी सारी ज़िन्दगानी।।
2.   यह भोग तुझे चौरासी की गलियाँ भटकाएँगे।
        फिर गर्भ योनि में डालकर उलटा लटकाएंगे।।
          तेरे पाप ताप मिट जाएंगे सुन ले सन्तों की बाणी।।
3.   यह सुन्दर बाग बगीचे और यह कंचन की काया।
        क्या पाया जो जीवन में विश्राम नहीं पाया।।
          तन होगा खाक की ढेरी राजा होया रानी।।
4.   ओरों को दुःख देने वाले सुख तू नहीं पायेगा।
        निष्काम कर्म करने वाला बन्धन में ना आयेगा।।
          इतना है सार धर्म का इतनी है कर्म कहानी।।
5.   दुर्लभ नर तन तो भव से तरने का साज है।
        मंज़िल को पायेगा चढ़ा जो नाम जहाज़ है।।
          बिन सुमिरण स्वांस न आए हो जाए ना नादानी।।

Wednesday, February 17, 2016

सन्त शरण जो आयेगा

तर्ज़-घर आया मेरा परदेसी------।
टेक-सन्त शरण जो आयेगा नाम खज़ाना पायेगा।
    दर पर जो झुक जायेगा सर ऊंचा हो जायेगा।।

1.  सतगुरु भाग जगाते हैं रहमत वो बरसाते हैं।
     जागेगा सो पायेगा पायेगा तर जायेगा।।
2.  मन अपना निश्चल कर ले सुरति को उज्जवल कर ले।
     शब्द से सुरति मिलायेगा वो नहीं भटका खायेगा।।
3.  प्रीत लगा गुरु चरणों से स्वाँस लगा ले सुमिरण में।
     जन्म मरण कट जायेगा भव बन्धन कट जायेगा।।
4.  नेक कमाई साथ लिये नाम का तोशा हाथ लिये।
     दरगाह में जो जायेगा मान व इज्ज़त पायेगा।।
5.  गुरु से रिश्ता खास रहे और न कोई आस रहे।
     वो गुरुमुख कहलायेगा चुग चुग मोती खायेगा।।
6.  दास जो मुर्शिद कामिल हो और मुरीद भी आमिल हो।
     प्रभु से वह मिल जायेगा घट में दर्शन पायेगा।।

Tuesday, February 16, 2016

सतगुरु तेरे सुमिरण में

टेकः-सतगुरु तेरे सिमरन में मस्ती का खज़ाना है।
     पर मिलता है उसको जो बनता दीवाना है।।

1.   जब ध्यान करूँ तेरा कुछ होश नहीं रहता।
        तेरे प्रेमी झूमते हैं रंग भक्ति का चढ़ जाता।।
            ये मस्ती उसी को मिलती जो तेरा दीवाना है।।
2.   न सुध तन की रहती न मन की सुध रहती।
        इक तेरे सिमरन की मीठी सी लगन रहती।
            तेरा सिमरण वो करता जो तेरा मस्ताना है।।
3.   प्रभु देख छवि तेरी, मन गद्गद् होता है।
        तेरे वचनों में ऐसा लगे ज्यों अमृत बरसता है।।
            तेरा प्यार उसे मिलता जो बना परवाना है।।
4.   मैं दासनदास तेरा हूँ तू है सिरताज मेरा।।
        हर जन्म में सेवा करुँ मिलता रहे प्यार तेरा।।
            तेरे दर्शन सेवा से मैने नाता निभाना है।।

Monday, February 15, 2016

तेरी जय होवे सतगुरु देव हमारे

टेकः-तेरी जय होवे सतगुरु देव हमारे।
     छोड़ अर्श को आये फर्श पे जग के तारनहारे।।

1.   परउपकारी नाम आपका पर उपकार कमाते।
        अपने भक्तों की खातिर प्रभु कई कई रूप बनाते।।
            देकर अपना प्यार अनोखा दुखियों के दुःख हरते।।
2.   तेरे नाम और भक्ति में है ऐसा सुख समाया।
        जो भी इसको अपनाए उसने आनन्द पाया।।
            है ये बात हकीकत समझो कहते देवता सारे।।
3.   इस दरबार की रचना करके बहुत रहम कमाया।
        सार जो सब ग्रन्थों का आपने खोल बताया।।
            जीवों का तो कहना ही क्या यहाँ पत्थर भी तर जाते।।
4.   सतपुरुषों के उपकारों को क्या-क्या कह सुनायें।
        शेष महेश भी गा-गा हारे तो भी पार न पायें।।
            आओ प्रेमी प्यारे मिलकर सुन्दर दर्शन पायें।।
5.   कहीं सरोवर कहीं श्री मन्दिर शांति भवन बनाये।
        समय-समय पर पहुँचकर श्री वचन फरमाये।।
            परमहँसों की चरण छाया में आकर जन्म सँवारे।।

Saturday, February 13, 2016

सतगुरु दर्शन को दुनिया सारी आई

तर्ज़-नयनों वाली ने हाय मेरा----।
टेक-सतगुरु दर्शन को दुनियाँ सारी आई।।

1.आज की रात नसीबों वाली महफिल है मस्तानी।
   सामने बैठे सतगुरु प्यारे पाई खुशी रूहानी।
    जन्म शताब्दी है सतगुरु की घड़ी है कितनी सुहानी।।

2.आज इस जग के हर कोने में बजती है शहनाई।
   तीनों लोकों में गूँज रही है बधाई होवे बधाई।
    मिटा अँधेरा हुई रोशनी प्रगटे गुरु सुखदाई।।

3.आज तो ब्राहृा विष्णु भी छुप छुप गुरु जी के दर्शन पाते।
   शिव शंकर डमरू को बजा कर सुन्दर नृत्य दिखाते।
    तैंतीस करोड़ी देवता सारे मिल जयकार बुलाते।।

4.बसन्त पँचमी की बहार ये मन को मोहित करती।
   श्री आनन्दपुर इतना सजा है नज़रें नहीं ठहरती।
    सचही कहूँ मैं यहाँ की शोभा बैकुण्ठ को मात करती।।

Friday, February 12, 2016

ऋतु बसन्त सुहानी है आई।।

टेक--प्रगटी है जग में ज्योति इलाही।
हर और खुशियाँ खुशियां हैं छार्इं।
शरद ऋतु ने ली है विदाई। ऋतु बसन्त सुहानी है आई।।
1.        आज के दिन प्रगटे द्वितीय महाराज।
सबको मुबारक होवे मुबारक बाद।
इनकी महिमा चौकुण्ठी में छाई।।
2.        पाप अधर्म ने डेरा उठाया।
नाम भक्ति का डंका बजाया।
चरणों में झुक गई सारी खुदाई।।
3.        परहित कारण लाखों कष्ट उठाये।
करुणा के सागर प्रभु करुणा कर आये।
रुहानी दौलत भर भर लुटाई।।
4.        हर युग युग में रुप बदल कर।
आये धरा पर भक्तों की खातिर।
जन्मों की बिछुड़ी रुहें संग मिलार्इं।।
5.        इनके चरणों पे दास जाये बलिहार।
बख्शा हमें अपना सच्चा आधार।
लोक परलोक में संग सहाई।।
तर्ज़--तू प्यार करे या ठुकराये------।

Wednesday, February 10, 2016

खुद खुदा को घर बुलाये

टेक-खुद खुदा को घर बुलाये कौन है वो प्रेम है।

1.    प्रेम है प्रह्लाद का और ध्रुव का भी प्रेम है।
         बादशाही को छुड़ावे कौन है वो प्रेम है।।

2.    प्रेम के वश हो पत्थर फाड़ कर आना पड़ा।
         गोएं जंगल में चराये कौन है वो प्रेम है।।

3.    प्रेम से छिलके खिलाये बेनमक के साग भी।
         झूठे बेरों को खिलाये कौन है वो प्रेम है।।

4.    प्रेम से सूली चढ़े वो जिन्हें तेरा प्रेम था।
         खाल गर्दन की खिंचाए कौन है वो प्रेम है।।

5.    प्रेम के दरबार में यह दास भी चाहता है प्रेम।
         आस जो दिल की बुझाय कौन है वो प्रेम है।।

Tuesday, February 9, 2016

तेरे नाम में लगी हो इतनी लगन

तर्ज़-मेरे प्यार की उमर हो-----।
शेयर-मिल करके सतगुरु तुम्हे खुश खूब हो गया हूँ।
      दुनियाँ की सारी दौलत दाता मैं पा गया हूँ।
       बख्शा मुझे खज़ाना अपने ही नाम का जो।
        उसको जपूँ हमेशा विनय ये कर रहा हूँ।
टेक- तेरे नाम मे लगी हो इतनी लगन।
       तेरे नाम में जीऊँ तेरे नाम में खतम।।
1.   नाम में तेरे दाता यूं खो जाऊं मैं।
       चारों तरफ बस तुझको ही पाऊँ मैं।
         तेरी प्रीत में बढ़ती रहे मेरी लगन।।

2.   मेरी सुरति स्वामी तुझ संग जुड़ी रहे।
       सब से सिमट कर तेरी ओर मुड़ा रहे।
         गुण गाऊं नाथ मैं तेरे ही हरदम।।

3.   इक टक छवि ये तेरी पल भर निहारूँ मैं।
       प्यारा तेरा नाम भगवन सदा ही उचारूं मैं।
         तेरी सेवा में हाज़िर है ये जानो तन।।

4.   प्रेमी ये तेरा प्रभु तुझ पे कुर्बान है।
       सब कुछ मिला है बस एक अरमान है।
         तेरे चरणों में अन्त समय निकले मेरा दम।।

Monday, February 8, 2016

तेरा दर्शन बड़ा प्यारा....

टेकः-मेरे सतगुरु मेरे शहनशाह तेरा दर्शन बड़ा प्यारा।
     वारी जावाँ तेरे तों मैं,वारी जावे संगत सारी,
         वारी जावे जग सारा।।
1.   बैठी सामने मेरे खुदाई ऐ।
         खुशी मन विच मेरे न समाई।
              बैठी सामने खुदाई खुशी मन न समाई,
                 मिलके संगत नाल बोलो जयकारा।।
2.   हो कमला गया वाँ मैं ते, तेरे चरणीं पया मैं ते।
        हो कमला गया वाँ, तेरे चरणी पया वाँ,
            मैनूं दिसदा नहीं कोई चारा।।
3.   सारे जग तों शान निराली।
         ऐ ताँ सारे जग दे वाली ने,
            जग तों शान निराली सारे जग दे ने वाली।
                ऐसा वेखिया न कोई वी द्वारा।।

Sunday, February 7, 2016

निक्का जेया कम्म

टेकः-निक्का जेहा कम्म शामाँ तेरे तों कराना ए।।
     पहलाँ तेरे चरणाँ विच सीस मैं झुकाना ए।।

1.   पहला कम्म शाम मेरे मन विच वस जा।
        जिधर वी वेखाँ मैनूं नज़र आवें हसदा।।
            तन मन विच नाले अखाँ च वसाना ए।।
2.   दूजा कम्म शाम मैनू परवाह नहियों मोक्ष दी।
        मैनूं वी चाहिदी तेरे सन्तां नाल दोस्ती।।
           तूँइयों दाता भव तों पार लगाना ए।।
3.   तीजा कम्म शाम जग जंजाल तों बचा लवो।
        सन्तां दी टोली विच नाम मेरा ला लवो।।
            सुनों हारां वाले कदी दिलों ना भुलाना ए।।
4.   चौथा कम्म शाम मन विचों विषयां नूं निकाल दो।
        मन अन्दर ज्योति सच्चे नाम वाली बाल दो।।
            अज तेरे रंग विच मैं तां रंग जाना ए।।
5.   पँजवां कम्म शाम जी ओ सब कोलों छोटा ए।
        अंत वेला आवे होवे कोल खलोता ए।।
            हत्थ फड़ मेरा अपने नाल ले जाना ए।।

Friday, February 5, 2016

सतगुरु तेरा दर्शन पाकर

तर्ज़-अफसाना लिख रही हूँ।
टेक-सतगुरु तेरा दर्शन पाकर , मिली खुशी अपार है।
    बेचैन दिल को मिल गया, चैनो-करार है।।

1.   कब से हम तड़प रहे थे, दर्शन की आस में।
     अब पूरी हुई है आशा, पाया दीदार है।।

2.   कैसी फिज़ा है बदली, प्रभु आने से तेरे।
     हर प्रेमी के हिरदे मे, छाई बहार है।।

3.   खुशियों में झूम रहे हैं, देखो सारे ही प्रेमी।
     सबके ही दिल का गुलशन, हो गया गुलज़ार है।

4.   इस शुभ घड़ी की दास यह , देता है बधाई।
     सतगुरु ने आज बख्शा, हमें अपना प्यार है।।

आई घड़ी है आज सुहानी

तर्ज़--रिमझिम बरसता सावन होगा।।
टेक--आई घड़ी है आज सुहानी ये हमारी भाग्य निशानी।
      आये आज हमारे घर में कुल दुनियाँ के स्वामी।।

1.    हुई जो रहमत श्री सतगुरु की सुन्दर दर्शन आज मिले।
        मुरझाये इस उपवन में हैं खुशियों के फिर फूल खिले।
           पाई है सच्ची दात लासानी।।

2.    गम चिन्ता और भरम अन्देशों से छुटकारा पाया है।
        पाकर सच्ची खुशी अनूठी सबका दिल हर्षाया है।
           कर दी ये प्रभु ने जो मेहरबानी।।

3.    तेरे उपकारों का बदला क्या देकर के चुकाएं हम।
        लाखों तन भी भेंट करकें गर, फिर भी देना पायें हमं।।
           महिमा तेरी ना जाए बखानी।।

4.    दासन दास की विनती भगवन अब तो मन्ज़ूर करो।
        इक पल भर के लिये भी हरगिज़ चरणों से न दूर करो।
           देखूँ सदा मैं छवि मन लुभानी।।

Thursday, February 4, 2016

जहाँ सतगुरु आते हैं सब खुशियाँ आती हैं

टेकः-जहाँ सतगुरु आते हैं सारियाँ खुशियाँ आती हैं।
     लै लै के चरण धूली गुरुमुख मुस्काते हैं।।

1.   सतगुरु के आने से शुभ मंगल होता है।
        गंगा कि तरह पावन मन निर्मल होता है।
             वे अपने भगतों को सब कुछ दे जाते हैं।।
2.   तन मन धन के सारे दुःख दूर करें दाता।
        विनय अपने भगतों की मन्ज़ूर करे दाता।
            जब प्रेमी बुलातें हैं प्रभु दौड़े आते हैं।।
3.   मेरा सूना यह मन खुशियों से महक उठा।
        सतगुरु ने दर्श दिया मन मेरा झूम उठा।
            दर्शन पाकर तेरा फूले न समाते हैं।।

Wednesday, February 3, 2016

सतगुरु मिल गये किस्मत नाल

टेकः-सतगुरु मिल गये किस्मत नाल।
     असीं ताँ हो गये मालामाल।।

1.   एह सुन्दर दरबार बनाया।
          सानूँ चरणां नाल मिलाया।
                ऐ ताँ किरपा होई अपार।।
2.   प्रेमा भक्ति दा रंग छिटकावन।
           रूहाँ नूँ निज घर पहुँचावन।
                ऐहदे मेहरां दे भरे भण्डार।।
3.   तूँ सतगुरु मेरी अखियाँ दा तारा।
           लगना हैं सारे जग कोलों प्यारा।
                 तैथों तन मन देना वार।।
4.   दासनदास दी ऐही अरदास।
           किरपा करीं प्रभु सदा तूँ खास।
                साडी निभ जाये चरणाँ नाल।।

Monday, February 1, 2016

तेरे चरणां विच अर्ज़ गुज़ारां दातया...

     टेक--तेरे चरणां विच अर्ज़ गुज़ारां दातया।
          सुन लो सुन लो दिलां दी पुकार दातया।।

     1.   सोहणें मुखड़े दी झलक दिखा के श्यामा।
             साडे वेड़े आके फेरा पा हुण श्यामा।।
                नित रस्ता मैं तेरा बुहारां दातया।।

     2.   तेरे बाझों न मेरा कोई दर्दी।
             विनती मन्ने न मन्ने तेरी मर्ज़ी।
                तरले मिनतां मैं कराँ हजार दातया।।

     3.   मेरे प्यार नूं ऐवें ही ठुकरावीं ना।
             वेख अवगुण दिल तों विसरावीं ना।
                मेरे दिल नूं तेरा ही सहारा दातया।।

     4.   तेरा नाम है दीन दयाल जी।
             करना दास दी हर पल सम्भाल जी।
                ऐसे लई मैं मलया तेरा द्वारा दातया।।

जिन्हां दे सिर उत्ते हथ गुरां दा...

टेकः-जिन्हां दे सिर उत्ते हत्थ गुरां दा ओहना नूं काहदा डर वे लोको।।
     जिन्हां ने डोरां हारां वाले ते सुटियां ओहना नूं काहदा डर वे लोको।।

1.   सतगुरु मेरेयां ने भवन बनाया।
        अपनी किरपा दे नाल सजाया।।
            जिन्हां दे पल्ले टिकट नाम दी ओहना नूं काहदा डर वे लोको।।
2.   ओह तां जहाज़ विच बैठे के आनगे।
        श्रद्धा ते भगती दे गीत ओ गानगे।।
            जिन्हां दे सिर सतगुरां दी मेहरां ओहना नूं काहदा डर वे लोको।
3.   इस जहान विच आनन्दपुर आ गये।
        आ के सतगुरां दे दर्शन पा लये।।
            जिन्हां पी लये प्रेम प्याले ओहना नूं काहदा डर वे लोको।।
4.   गुरां दे द्वारे उत्तों मँगदे न संगिए।
        सतगुरु कोलों बस भक्ति ही मँगिए।।
          जिन्हां दे बन गये सतगुरु प्यारे ओहना नूं काहदा डर वे लोको।।